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क्या वह भूत था ? is there any ghost ?

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मित्रो मेरा नाम सुधांशु कुमार मिश्रा है और मै मेघालय का रहने वाला हु | यह उस समय (1982) की घटना है जब मैं आई आई टी खड़गपुर में पीएचडी कर रहा था और अपनी पत्नी और बच्चोँ के साथ विश्वेश्वरैया निवास गेस्ट हाउस में रहता था। लेक्चरर होने की वजह से मुझे दिन भर क्लास के लिए पढ़ने और पढ़ाने से फुर्सत नहीं मिलती थी । इसलिए मेरे अपने रिसर्च का काम शाम व रात में ही डिपार्टमेंट में करना पड़ता था। मैं तक़रीबन रात के एक बजे साइकिल से गेस्ट हाउस लौटता था। डिपार्टमेंट से गेस्ट हाउस की दूरी (साइकिल से) कोई तीन मिनटों की थी। मेरा एक बजे रात में डिपार्टमेंट से गेस्ट हाउस लौटने का वह सिलसिला महीनों से चल रहा था। रात के एक बजे सड़क तो जरूर सुनसान होती थी, लेकिन सबकुछ कैम्पस में होने की वजह से कोई डर या खतरा नहीं था। सड़क पर पूरा उजाला रहता था। इंस्टिट्यूट के मुख्य द्वार (मेन गेट) से जो सड़क विश्वेश्वरैया निवास को जोड़ती है वह एक चौराहे से गुजरती है। चौराहे से एक सड़क डाइरेक्टर के बंगले की तरफ जाती है और उसकी प्रतिगामी (ऑपोज़िट) सड़क एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग विभाग की तरफ जाती है। तीसरी सड़क इंस्टिट्यूट के मेन गेट से आकर च...