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Showing posts from July, 2016

मोबाइल से नफरत करती भूतनी का आतंक | Mobile se Nafrat Karti Bhootni Ka Aatank

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मेरा नाम विशाल बादल है। और मै एक गरीब परिवार का लड़का हूँ। मेरे पिताजी काफी कंजूस मक्खी चूस किसम के इन्सान है। अपनी पढ़ाई का कहूँ तो, “तारे ज़मीन पर” फिल्म के ईशांत अवस्थी और मेरी हालत लगभग सेम है। बचपन से ही तीन चीज़ो का तगड़ा शौख है। बाइक, मोबाइल, और एक अच्छी गर्ल फ्रेंड । पर मेरी फूटी किस्मत से मेरे पास तीनों ही नहीं थी उस वक्त तक। दस्वी की परीक्षा में तीन बार गुलाटी खाने के बाद पिताजी ने मुजे हाथों से पीटना छौड़ दिया था, चूँकि उसके बाद उन्हे जब भी गुस्सा आता तो वह छड़ी, जूते, बरतन जो हाथ लगे उसी से मेरा सत्कार कर देते। किस्मत से मेरे मामा को मुज गरीब पर रहेम आया, और उन्होने मुजे एक बढ़िया सा मोबाइल गिफ्ट कर दिया। काश उन्होने मुजे कभी मोबाइल  दिया ही ना होता… मेरे पास मोबाइल फोन ना होता तो उस भयंकर भूतनी का में शिकार हुआ ही ना होता… मामा के दिये हुए मोबाइल को ले कर मै पूरे मोहल्ले में राजा बना घूम रहा था। जैसे की किसी अरबी शैख को नया तेल का कूवा मिल गया हो। मै पीपल के पैड के पास बैठ कर मेरे दोस्तों को नया मोबाइल दिखा ही रहा था की वहाँ एक अजनबी लड़की आई… उसने पूछा की नया फोन ...

मुर्दे खानें वाली चुड़ैल प्रेत का शिकंजा Maneater Chudail Story in Hindi

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मेरा नाम बाबुल घोष है, और में कोलकाता से हूँ। मैंने लगभग हर तरह की नौकरी आजमाई  है। और अनगिनत नौकरियों से निकाला जा चुका हूँ। पढ़ाई में मै हमेशा अंडे ही उबालता था, इस लिए दस्वी कक्षा की अंतिम परीक्षा में आए स्पीडब्रेकर नें स्कूल से मेरा नाता हमेशा के लिए तौड दिया था। इस समय मै पच्चीस का हो चला हूँ। अब तो पिताजी भी गुस्से मै बोलते रहते हैं की… बेटा तू शायद जिंदगी भर मेरे टुकड़ों पर ही पलेगा। मुर्दाखोर चुड़ैल से जब मेरा सामना हुआ तो मै लगभग अपनी जान गवा ही चुका था। पिछले महीने के एक दिन की बात है जब, हमेशा की तरह पिताजी मुजे काम ना मिलने के कारण जली-कटी सुना रहे थे, तब गुस्से में आ कर मेंने भी उन्हे बोल दिया की आज शाम तक अगर मै नौकरी नहीं ढूंढ पाया तो रात को घर वापिस नहीं आऊँगा। ऐसा बोल कर मै काम ढूँढने की खोज में लग गया। रात के बारह बजे तक भटका, पर कोई काम ना मिला। अंत में निराश हो कर एक वीरान कब्रिस्तान के पास पैड के नीचे बैंच पर सो गया। क्यूँ की घर तो काम ढूंढ कर ही जाना था। अभी मेरी आँख लगी ही थी की कब्रिस्तान में से…  फावड़े और कुल्हाड़ी ज़मीन पर फटकने की आवाज़ आने लगी। में जाग ...