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Showing posts from October, 2016

एक भयानक राज़ | Ek Bhayanak Raaz

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मेरा नाम तूलिका नंदा है। मै एक social activist हूँ। वैसे तो मेरी शादी मणिनगर में हुई थी पर शादी के दो साल के बाद ही मेरा तलाक हो गया था। अब में दिल्ली में अपनें माता-पिता के घर पर ही रहती हूँ। और डोमेस्टिक वायोलेन्स (घरेलू जगड़ों) की शिकार महिलाओं की सहायता में कार्यरत एक organization से जुड़ी हुई हूँ। शादी टूट जाने से कोई औरत खुश तो नहीं होती है, पर शादीसुधा रह कर अत्याचार सहने से कई ज़्यादा अच्छा है अकेले रह कर शांति से जीवन बिताया जाये। मै आज उस खतरनाक राज़ के बारे में बताना चाहती हूँ जिसके कारण मेरा तलाक हुआ था। वैसे तो मेरे पति मेरा खूब खयाल रखते थे, पर जब उन्हे गुस्सा आए तब वह अजीब इन्सान की तरह पेश आने लगते और उनकी आवाज़ भी भारी हो जाती, मुझे लगा था की शायद गुस्सा होने पर ऐसा बदलाव आता होगा, पर ऐसा कुछ भी नहीं था। उनके उस भयानक बरताव की वजह कुछ और ही थी। एक रात मै और मेरे पति सोये हुए थे, तभी अचानक मैंने महेसूस किया की मेरे पति गहेरी गहेरी साँसे ले रहे थे, और नींद में बोले जा रहे थे की मुझे छोड़ दो,,, बस करो बस करो,, मुझे माफ कर दो,,, जो कुछ भी हुआ उसमें मेरी गलती नहीं थी,,, यह सब स...

जेल में चुड़ैल का आतंक | Jail Me Chudail Ka Aatank

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मेरा नाम किशनलाल मौरी है। मै पेशे से एक लौहार हूँ। मीरा नगर में गांधी चौक में मेरी छोटी सी दुकान है। मेरे घर में मेरी बीवी हेमा और मेरा बेटा योगेश है। वैसे तो दुकान का काम काज ठीक-ठाक चल रहा था, पर मेरे काम में तेजी-मंदी भी चलती रहती थी। घर के खर्चे बड़ी मुश्किल से निकल रहे थे। एक दिन एक ग्राहक आया और उसने मेरी दुकान पर आ कर एक लोहे की जाली बनवानें का ऑर्डर दिया। मुझे पक्का याद है की उसने एडवांस में 500 रुपेय दिये थे। पर जब वह तैयार हो चुकी जाली लेने आया तो, यह ज़िद करने लगा की उसने 1000 एडवांस दिया था। इसी बात पर मेरी और उसकी हाता-पाई हो गयी। और मैने गुस्से में उसके सिर पर लोहे का पाइप मार दिया। इस कांड की वजह से मुझे 1 साल की जेल हो गयी। वैसे तो में आज जेल से रिहा हो चुका हूँ पर,,, पर जेल की कड़वी यादें आज भी मुझे बहुत डराती है। जेल के अंदर मुझे “सी” बैरेक में रखा था। मेरा कैदी नंबर 13 था। एक रात जब मै सोया हुआ था तो मैंने किसी औरत के हसने की आवाज़ सुनी। मै चौक गया। जब मैंने लॉबी में देखा तो दूर अंधेरे में कोई औरत खड़ी थी। मुझे यकीन नहीं हुआ की मर्दों की जेल में एक औरत कैसे घुस आई होग...

मनहूस गाँव में भूत-प्रेत का आतंक | Manhus Gaanv me Bhoot ka Aatank

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मेरा नाम बिपिन गरेजा है। और मै मणिपुर का रहवासी हूँ। मै कुछ समय तक मुंबई में रहा हूँ, चूँकि मुझ पर फिल्म डाइरेक्टर बनने का भूत सवार था। थोड़े दिन तक असीस्टंट फिल्म डाइरेक्टर का काम भी मिला, पर जैसा सोचा था वैसी सफलता हाथ लग नहीं रही थी। इस लिए मैने फिल्म डाइरैक्शन का काम छोड़ कर राइटिंग का काम शुरू कर दिया। ग्रुप बन चुका था इस लिए काम आसानी से मिल रहा था। और script (कंटैंट) ऑनलाइन ही ग्राहक को भेजना होता था तो यह काम इंटरनेट की सहायता से किसी भी जगह से किया जा सकता था। एक बार मुझे होर्रर स्क्रिप्ट लिखने का ऑफर आया। जिसमें गाँव की कहानी सेट करनी थी। तो मैने सोचा की रियल लोकेशन वाला फिल लाने के लिए किसी गाँव में कुछ दिन रहे आता हूँ। ताकि कहानी अच्छी बन सके। आगे काफी सोच विचार करने के बाद मुझे किसी नें सुझाव दिया की उत्तर प्रदेश में चंदन पुर गाँव है, जहां पर कई लोगों को भूत प्रेत के अनुभव हुए हैं। मैंने फौरन वहाँ की टिकट कटवाई। और अपने लैपटॉप के साथ वहाँ जा पहुंचा। बस नें मुझे किसी कच्चे रास्ते पर उतारा, वहाँ आसपास कुछ पैड थे और एक सकरा रास्ता। एक पैड पर आठ दस कववे (crow) बैठे थे, मुझे देख...