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बिना आँखों वाले क्रोधी मुंड का त्रांडव

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मेरा नाम विकास खेलकर है | मैं लातूर में रहता है | मेरे आई बाबा नें बहुत खर्चा कर के मेरे को पढाया | लेकिन मेरे को हमेशा अच्छी जॉब के वांधे रहे हैं | अब खर्चा पानी चलाने के लिए कुछ ना कुछ तो करना ही था | इसलिए मैंने एक चिप्स फैक्ट्री में सुपरवाइज़र का नौकरी ले लिया | मेरा शिफ्ट 11 बजे रात में शुरू होता था इस लिए मैं आराम से खाना-गिना खा के नौकरी पे चला जाता था | उस रात करीब 1 बजे फेक्टरी का पावर सिस्टम शोट हो गया | सेठ बोला चारो लोग घर चले जाओ | आज छुट्टी | मेरे तीनो कलिग घर को निकल गए | लेकिन मै किसी कीमत पर अँधेरे में सायकिल पर घर को नहीं जाने वाला था | सेठ बोला की, ताला लगा के ही फेक्टरी में सोजा | मैंने शायद वही डेंजर गलती कर दिया | मुझे क्या पता था ऐसा करने पर मुझे खून के आंसू रोना पड़ेगा | सब के जाने के बाद मैंने अंदर से ताला लगाया | तभी अचानक आलू छिलने का मशीन का पहिया घुमने लगा | एक पल के लिए मेरी हालत पतली हो गयी | मेरी धड़कन तेज़ हो गयी | मैं चिल्लाया… कौन है वहां,,, लेकिन कोई जवाब नहीं आया | मैं फुर्ती से ताला खोल के फेक्टरी से बहार जाने लगा | लेकिन पनवती कहींका, ताला खुल...

Birthday Party में दो सिर वाली डरावनी रूह का आतंक

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मेरा नाम विपुल राजपरा है | मैं फोटोग्राफी स्टूडियो में काम करता हूँ | मेरे पास खुद का कैमरा आ चूका था इस लिए, मैं प्राइवेट ऑर्डर्स भी ले लेता था | एक दिन मेरी लता भाभी नें कुतियाणा गाँव का एक काम दिलाया | किसी की बर्थडे पार्टी थी | आने-जाने का अलग से पैसा मिल रहा था | और फोटोग्राफी का भी अच्छा पेमेंट मिल रहा था | इस लिए मैंने काम के लिए तुरंत हामी भर दी | दिक्कत सिर्फ यही थी की, पार्टी देर रात तक चलनी थी | उसके बाद वहां पर रुकने का कोई अच्छा ठिकाना नहीं था | इस लिए रात में ही ट्रावेल कर के घर लौटना था | काश उस खौफ़नाक रात की याद मैं अपनी ज़िंदगी से मिटा सकता | मुझे याद है , आर्डर की डेट पर, मैं कैमरा सेटअप ले कर वहां पहुँच गया था | रात को 8 बजे पार्टी शुरू हुई | अभी मैंने 4 से 5 फोटो खिंची ही थी तभी अचानक, एक सुनेहरे बाल वाली गोरी चिट्टी लड़की मेरे सामने आ गयी | उसने हॉल के बाहर आने का इशारा किया | शायद उसे कुछ काम होगा | मैंने उसे कैमरा दिखाया और कहा अभी नहीं आ सकता | फिर कुछ देर बाद, सारी फोटो खिंच लेने पर, मेरी नज़र उस लड़की को खोजने लगी | तभी अचानक वह मुझे घर के बाहर थोड़े दूर नज़र ...

मनहूस दिन - छिछले पानी के अंदर मौत का भयानक मंजर

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Dead girl in water मेरा नाम रणविजय बादल है | मेरे पिता एक बिजली कंपनी में कर्मचारी हैं | आज से करीब एक महीने पहले की बात है, माँ नें मुझे मंडी जा कर सब्ज़ी लाने को कहा | मैं अपना काम निपटा कर बाज़ार की और जाने लगा, तभी अचानक मुझे ज़ोर ज़ोर से एक कुत्ते के रोने की आवाज़ आने लगी | मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो, पता चला की वहां पर एक अंडर कंस्ट्रक्शन मकान था | मुझे लगा की भूख के मारे कुत्ता रो रहा होगा | इस लिए, सब्ज़ी ले कर आते वक्त, मैं पारले बिस्कुट का पैकिट ले कर, उस मकान की और जाने लगा | ताकि उस कुत्ते को कुछ खिला सकूँ | अभी में मकान के दरवाज़े तक पहुंचा तो, और ज़ोर ज़ोर से कुत्ता रोने लगा | इसके साथ साथ उस मकान की खुली सीवेज (बन रही खुली टंकी) का छिछला पानी ज़ोर ज़ोर से उछलने लगा | यह सब देख कर मेरे हाथ पाँव फूल गए | मैं सब्ज़ी का थैला और बिस्कुट वहीँ गिरा कर उस खुली टंकी की और भागा | मुझे लगा कहीं पानी भरी टंकी में कुत्ता डूब रहा होगा | लेकिन जब मैंने वहां अंदर झाँका तो मेरी रूह काँप गयी | उस ज़मीनी टंकी के खड्डे में एक काला कुत्ता सिसक रहा था | पहले तो मुझे लगा की, वह उसमें गिर गया होगा | लेकिन थ...

नूर मंज़िल का रोंगटे खड़े कर देने वाला किस्सा | Nur Haveli Haunted House Story in Hindi

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  Nur Haveli Haunted House Story in Hindi मेरा नाम लतिका करीम है | मेरे अब्बू बेकरी चलाते हैं | कुछ ही दिनों में मेरी शादी होने वाली थी | लेकिन तभी अचानक हमारे घर पर एक बड़ी मुसीबत आन पड़ी | दरअसल हमारा घर गैर-मालिकाना जगह पर बना हुआ था तो, म्युन्सिपल कोर्पोरेशन की और से जगह छोड़ने का नोटिस आ गया | अब्बू नें मेरे मामू से मदद मांगी तो उन्होंने, हमारे रहने का इंतज़ाम नूर मंज़िल में करा दिया | अब हम नूर मंज़िल में पनाह तो ले लिए, लेकिन हमें उस जगह पर बड़ा भयानक एहसास हो रहा था | जैसे कोई दर्रिंदा किसी जिंदा इन्सान को नोच रहा हो, जैसे कोई मासूम रो रो कर किसी से दया–रहेम की भीख मांग रहा हो | हमनें यह बात अब्बू से कही तो हमें जम कर डांट पड़ी | उस समय हमारे घर के हालात इतने खस्ता हो चुके थे की, दिन रात मेरा पूरा परिवार उसी सोच में डूबा रहता था की, नूर मंज़िल से जाना पड़ा तो फिर कहाँ जायेंगे | ना कोई बचत थी ना कोई ज़मीन थी | जिसे अपना घर समझा था वह बस अब इतिहास बन चूका था | उस रात बहुत बारिश हुई | बारिश थमी तो बीजली चली गई | हम नें सोचा घर की छत पर जा कर खुली हवा में सांस लेते हैं | अम्मी अब्बू तो ऊप...

पूजा का खौफनाक अंजाम - उस क़िस्से की याद से दिल में आज भी बिजली कौंध जाती है

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पूजा का खौफनाक अंजाम – उस क़िस्से की याद से दिल में आज भी बिजली कौंध जाती है मेरा नाम साधना है और मैं एक आर्ट्स स्टूडेंट हूँ| पिताजी एक सरकारी अफ़सर होने की वजह से हमें बार बार शहर बदलना होता था। देहरादून में अच्छा कॉलेज मिलते ही मैंने वहां Admission ले लिया। क्लास में पहले ही दिन मेरी मुलाकात पूजा हुई। वह दिखने में सुंदर और स्वभाव से बड़ी चंचल थी। उसे पैसे खर्च करने और घूमने-फिरने का बड़ा शौख था। अपनी इसी आदत के कारण पूजा एक दिन रूह कपकपा देने वाली मुसीबत में फँस गयी। एक दोस्त होने के नाते मैंने उसे बार बार समझाया लेकिन मेरी हर कोशिश नाकाम रही। दरअसल वह अपनी छोटी छोटी ज़रूरतें पूरी करने के लिए लड़कों को टहेलाती रहती थी। उस भयानक द पहर का समय आज भी मुझे याद है, जब हमने बरगद के पेड़ के नीचे खड़े उस लड़के को देखा।   कॉलेज जल्द ख़त्म हुआ था तो पूजा हर कीमत पर उस वक्त फिल्म देखने जाना चाहती थी। हमारे पास ज़्यादा पैसे नहीं थे तो, पूजा नें उस लड़के के खर्च पर यह ट्रिप एन्जॉय करने का प्लान बनाया। मैं इस तरह की ओछी हरकत के लिए बिलकुल सहमत नहीं थी। फिर भी पता नहीं क्यूँ मैं उस वक्त खुद को रोक ना सक...

मनसुख और चम्पा की जोड़ी ने फैलाया, गाँव में आत्माओ का कहर

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इन्सान की बुरी आदत उसकी बरबादी का कारण कैसे बनती है| यही बात इस सत्य घटना से पता चलती है| जब इन्सान को मेहनत करने की आदत नहीं रहती है तो वह अपनी ज़रूरतें पूरी करने के लिए गलत रास्ते चुनता है| जिस कारण अंत में रूह कपकपा देने वाला अंजाम मिलता है| बगवदर गुजरात का एक छोटा सा गाँव है| आबोहवा खेती के अनुकूल होने के कारण गाँव खुशहालीभरा जीवन बिता रहा था| बात 1993 की है| मनसुख के बाबूजी दिन रात खेती-बाड़ी कर के घर का खर्चा चला रहे थे| बेटा जवान हुआ तो पिता नें उसे काम-काज में हाथ बटाने को कहा, लेकिन मनसुख सिर्फ मटर-मस्ती करने और जुआ खेलने में मगशुल रहता था| इस लिए माँ बाप नें उसे घर से निकाल दिया|  अब मनसुख चंपा नाम की कुख्यात लड़की के साथ रहने लगा| इन दोनों की दोस्ती का कारण ही जुआ था| दोनों मिल कर गाँव के लोगों को जुआ खिलाने लगे और खुद भी दाव लगाते| करीब 3 महीने में दोनों दिवालिया हो गए, फिर खाने के लाले पड़ गए| चंपा और मनसुख दोनों जानते थे की, अब उन दोनों की मदद कोई नहीं करेगा| इस लिए उन दोनों नें गाँव के बच्चों को निशाना बनाना शुरू किया| उन्होंने ऐसे ठिकानो का पता किया जहाँ, लोग बेमौत मरे थे| ...

ललित का भयानक प्रेत, जिसका गुस्सैल चेहरा आज भी आँखों के सामने है | Lalit ka Bhayanak Pret

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मेरा नाम हिरल महेता है और मेँ सूरत का रहने वाला हूँ। जी॰ एस॰ रोड पर हमारी किराने की बड़ी दुकान है। आज मुझे हमारी दुकान पर काम करने वाले ललित के बारे में बात करनी है। ललित वैसे तो एक महेनती लड़का था, पर शायद उसे कुछ दिमागी तकलीफ थी। उसे गुस्सा काफी जल्दी आ जाता था, और वह थोड़ा मुह-फट भी था। गरीब घर का लड़का समझ कर हम उसे काम तो दे दिया, पर हमे मालूम नहीं था की येही हमारी सब से बड़ी गलती साबित होगी। आज ललित तो इस दुनिया में नहीं है पर ललित का खौफनाक प्रेत दुकान पर दिन रात मंडराता रहता है। एक साल पहले एक दुखियारी औरत हमारी दुकान पर आई, उसने हाथ जौड कर कहा की मेरे बेटे के लिए कुछ काम ढूंढ के दीजिये। मेरे पापा नें फौरन उन्हे कहा की आप के बेटे को कल से यही काम पर भेज दीजिये। इस तरह ललित को जाने बिना ही काम पर तो रख लिया पर धीरे धीरे ललित का गुस्सैल स्वभाव सामनें आने लगा, तब ललित हमारे लिए मुसीबत बन गया। पापा नें उसे कई बार समझाया पर उस लड़के पर कोई असर नहीं हुआ। एक दिन ललित हमारे पुराने ग्राहक से जगड़ पड़ा और वह ग्राहक बिना सामान लिए दुकान से चला गया। मेरे पापा को और मुझे काफी गुस्सा आया। चूँकि अब ल...