गोलकुंडा फोर्ट पर हुआ भूत से सामना Encounter With Ghost at Golkonda Fort
मेरा नाम रषेश चदूरवेली है। और मै आन्ध्रप्रदेश का रहने वाला हूँ। दो साल पहले मेरे साथ हुई एक भयानक घटना के बारे में मै सबको बताना चाहता हूँ। कॉल सेंटर मै जॉब मिलने की खुशी में मैने अपने सारे दोस्तों को गोलकुंडा फ़ौर्ट घूमने ले जाने की पार्टी दी थी। वहीं मेरा सामना एक भयानक पारलौकिक शक्ति से हुआ था। उस घटना में जब मुझ पर हमला हुआ तो मै बेहोश हो गया था।
उस दिन हम चार दोस्त गोलकुंडा फ़ौर्ट पार्टी करने गए। सारा खर्चा मेरे पर था इस लिए मुजे पता था की मेरे भूक्कड़ दोस्त दबा दबा कर खाएँगे। पर नौकरी मिल चुकी थी तो मेंने भी कंजूसी नहीं की। और ढेर सारा फास्टफूड पैक करा लिया था।
गोलकुंडा फ़ौर्ट पर हम चारों कुछ देर तक घूमे और फिर एक जगह छाँव देख कर नाश्ता खाने बैठ गए। दोपहर का वक्त था वहाँ ज्यादा भीड़ भी नहीं थी। हम नाश्ता खाने और मस्ती मज़ाक करने में मग्न थे तभी एक लंबा और काला आदमी उधर आया। और हम चारों को घूरने लगा।
हमने पूछा की क्या बात है कुछ चाहिए… तो वह बोला की…
“यह मेरा सोने का समय है… तुम लोग मुजे अशांति पहुंचा रहे हो। चले जाओ यहाँ से… और यहाँ फैलाई हुई गंदगी साफ कर के जाना।“
हम चारों तो चौक गए। पर फिर भी वह उम्र में बड़ा था तो हम खड़े हो कर वहाँ से जाने लगे। तभी उसने हमे रोक कर कहा की अपनी फैलाई हुई गंदगी साफ कर के जाओ। अब मेरा दिमाग हट गया… मैने उसे कहा की “क्या यह तेरे बाप की जगह है? प्लास्टिक के कप, धूल मे पड़ा पिज्जा, मूँगफली, और दो चार कागज के टुकड़े तुजे इतने नड़ रहे है? जो हमसे लड़ने पर तुला है? जा नहीं उठाते कचरा… कर ले जो करना है…”
मेरा यह जवाब सुन कर वह गुस्से से लाल हो गया। और डरावनी आवाज़ में घुरराने लगा। हम चार थे तो मै भी थोड़ा ताव में आ गया मेंने उसे धक्का दे कर गिरा डाला। उसके बाद जो हुआ उसे याद करने पर भी… मेरी चीख निकाल जाती है।
जैसे ही वह लंबा काला इन्सान मेरे धक्के से नीचे गिरा की तुरंत उसके मुह से खून की फुवारें छूटने लगी। और वह पागलों की तरह हसने लगा। हम चारों दोस्त इतना डर गए की पूछो मत। या तो वह इन्सान काफी बीमार था, या फिर वह इन्सान ही नहीं था।
खून देख कर हम चारों दोस्त वहाँ से पागलों की तरह भागे। उस जगह से करीब 100 मीटर दूर जा कर हमने मूड कर देखा तो वहाँ कोई इन्सान था ही नहीं। यह देख कर मेरी तो रूह काँप गयी। क्यूँ की वहाँ से आने जाने का एक ही रास्ता था और उस जगह हम चार दोस्त उस वक्त खड़े थे।
मैने या मेरे दोस्तो ने फिर कभी उस काले लंबे इन्सान को कही भी देखा तो नहीं है, पर मेरे साथ कई बार एक अजीब वाकिया होता रहता है। मेरे घर में कई बार प्लास्टिक के कप पिज्जा के टुकड़े और मूँगफलियाँ बिखरी पायी जाती है। घर में अगर वह चिजे लायी गयी हों तो तो ठीक है, पर ना हों तब भी वह चीजे पड़ी मिलती है। जो गोलकुंडा फ़ौर्ट में हमने खा कर फेंकी थी।
शायद वह लंबा काला आदमी कोई भूत प्रेत होगा। और वह मुजे बार बार हम दोस्तों की गलती याद दिला रहा है। मेरे दोस्तों ने उसे धक्का नहीं दिया था, पर मैने दिया था। और मै उस से झगड़ा भी था। मुजे पता नहीं की अगर वह भूत प्रेत हुआ तो आगे मेरे साथ क्या कर के मुजसे बदला लेगा। “प्रेय फॉर मी फ़्रेंड्स”
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