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Showing posts from September, 2016

Manav Bhakshi Aghori Tantrik

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Mera Naam Gautam Karmakar hai. Aur me Gangapur ka nivasi hu. Meri umr 32 saal ho chuki hai, aur mene abhi tak shadi nahi ki hai. Zindgi se jo ummide thi, vah puri nahi hui, aur jo zindgi ne diya vah mujhe pasand nahi aaya. Is liye kuch salo se life se interest udd saa gaya tha tha. Kaam kaaj me aur social life me bilkul ji nahi lagta tha. Logo se milna-julna bhi accha nahi lag raha tha. Har pal ek becheini si mahesus hoti rahti thi, is liye pichle saal me kisi ko kuch bhi bataye bina ghar chod kar chala gaya tha. Apni isi nadani ke karan me bahut badi bhayanak musibat me pad gaya tha. Saal bhar pahle ki baat hai, jab me raat ke 11 bajhe ghar se nikal gaya. Me sidha railway station gaya aur bina tikat train me savaar ho gaya. Train ke general compartment me mere paas ek aghori aa kar beith gaya. Pata nahi kyu par vah baar baar mujhe ghure jaa raha tha. Usne sidha mujhe puch liya ki mere sath aaoge? Mene usko naa kaha, to vah chup chap baith kar fir se mujhe ghurne laga. Tabhi achanak ...

मुर्दा बना प्रेत – खौफ की एक सच्ची कहानी | Murda Bana Pret

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मेरा नाम भावेश लोढारी है, और में खारवा जाती से हूँ। मेरा जन्म तो बखरला गाँव में हुआ था पर अब मै वेरावल सिटि में रहता हूँ। करीब छे महीने पहले की बात है, मेरी नौकरी छूट गयी थी और मेरे पास खाने-पीने के पैसे भी नहीं बचे थे। हालत इतनी बुरी थी की कई जगह से उधार ले कर खानें पीने का खर्चा चलना पड़ रहा था। उन दिनों कुछ भी कर के मै पैसे कमाने के लिए तैयार था। पैसों की तंगी की वजह से मै इतना depressed था की सही-गलत का फर्क भी मीट चुका था। अपनी उसी कंगाली के दौर मै एक बार मौत के मुह में जा पहुंचा था। करीब छे महीने पहले की बात है,,, मेरा पड़ौसी मनसूख़ मेरे घर आया। उसनें मुझ से कहा की यार पैसे कमाने का एक आइडिया है। मैने कुछ भी पूछे बिना मनसूख़ को हाँ बोल दिया। मैंने उसे कहा की काम कुछ भी हो पैसे मिलने चाइए। अच्छाई बुराई भाण में गयी। पेट में आग लगती है तो रोटी से ही आग बुझती है, आदर्शों से नहीं। मनसूख़ नें कहा की,,,, आज रात 12 बझे तैयार रहना। तीन घंटे का काम है और 5000 मिलेंगे। आधे तेरे और आधे मेरे। मैंने डील डन कर दी। उस रात मनसूख़ रिक्शा ले कर ठीक 11.30 को मेरे घर आ गया। मै भी कुछ भी सोचे बिना उसकी रि...

Sidhiyo Ke Peeche Chupa Bhayanak Bhoot

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Mera naam Milan jethva hai. Aur me Jamnagar ka nivasi hu. Me ek darzi (Tailor) hu. Bhagvaan ki daya se kamai acchi ho jati hai, is liye vaghesvari plot jaise posh area me makaan le rakha hai. Mere pitaji ab darzi-kaam nahi karte hai, vah ab retire life bitate hai. Kuch dino pahle mera samna ek gusseil bhoot se hua tha, jisne mere pasine chuda diye thei. Aaj mujhe ehsaas ho gaya hai ki maut kabhi bhi aa sakti hai. Aur yeh zaruri nahi ki insaan har baar maut ko maat de kar bach jaye. Shayad us raat shukrvaar tha, mei apni dukaan par baith kar kapde see raha tha. Tabhi achanak mujhe ehsaas hua ki dukaan ke samne sidhi ke piche koyi chupa hua hai. Jo baar baar meri aur dekh raha hai aur fir se chup raha hai. Maine gaur kar ke vahan dekha to mujhe pata chala ki vahan koyi aadhed umr kaa mard tha. Jiske aadhe sir par ghunghrale baal the, aur uski aankhe radium jaisi neeli chatak thi. Us ka bhayanak rup dekh kar mere to rongte khade ho gaye. Mujhe dar to lag raha tha par fir bhi himmat kar ...

वॉटर पार्क में घूमती रूह | Encounter With Ghost in Water Park

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इम्तिहान खतम होते ही मैंने पापा के सामने अपनी फरमाइश रख दी थी, की मुझे वॉटर पार्क घुमनें जाना है। इस बार तो माँ भी मेरे साथ थी, चूँकि तीन साल से हम कहीं घुमनें नहीं गए थे। मेरे पापा पुलिस ऑफिसर है तो उन्हे छुट्टी काफी कम मिल पाती है। वैसे मेरा नाम मिली है। और मैनें अभी अभी बारहवि कक्षा पास की है। मै जो किस्सा बताने जा रही हूँ, वह मेरी पिछली छुट्टीयों के दौरान ही मेरे साथ घटा था। उस दिन सुबह करीब दस बझे मै, पापा और माँ शांतादेवी वॉटर पार्क में पहुंचे। वॉटर पार्क के गेट पर एक बूढ़ा सा चौकीदार था, जो मुझे अजीब नज़रों से घूरे जा रहा था। मैंने फौरन पापा से इस बात की शिकायत की। मेरे पापा काफी गुस्से वाले इंसान है। वह तुरंत उसके पास गए और उसे काफी डांटा और धमकाया। फिर हम तीनों वाटेर पार्क के अंदर चले गए। अभी मै स्विमिंग पूल में उतरी ही थी, की तभी वहाँ मेरी ही उम्र की एक लड़की मेरे पास आई, उसने मुझे कहा की क्या तुम मुझको तैरना सिखाओगी…? तो मैंने उसे हसी-खुशी हाँ कह दिया। और मै उसे तैरना सीखानें में व्यस्त हो गयी। मेरे पापा और माँ पास में ही रिलैक्स चैर पर बैठे थे। तभी अचानक पापा नें मुझे आवा...

ज़मीन मे दफन कंकाल का आतंक | Jameen Me Dafan Kankal Ka Aatank

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मेरा नाम नील नथवानी है। और मे पुना में रहता हूँ। मै एक स्टूडेंट हूँ। मेरे पापा RTO ऑफिस में कर्मचारी है। अपने पापा की एकलौती सन्तान होने की वजह से वह मुझे काफी लाड़ प्यार करते हैं। मेरी हर ज़रूरत पूरी भी करते हैं। कुछ समय पहले हमनें अपना पुराना मकान बैच कर city से थोड़ा दूर एक प्लॉट खरीदा था। मेरे पापा नें उसी पर एक मकान तैयार कराया था। अभी हम उस मकान में रहने गए ही थे की प्रेत आत्मा और भूतों नें हमारा जीना हराम करना शुरू कर दिया। एक दिन की बात है, जब मै दोपहर में किताब पढ़ रहा था तो मेरे बैड रूम की ज़मीन पर कुछ आवाज़ें आने लगी,,, और मुझे ऐसा लगा की पीछे से कोई मेरे बाल खींच रहा है। फिर थोड़ी देर में ऐसा लगा की, जैसे की ज़मीन के अंदर से कोई खुदाई कर रहा हो। वह आवाज़ इतनी भयानक थी की मुझे बहुत डर महेसूस हुआ। मैंने फौरन अपनी माँ को वहाँ बुलाया। हम दोनों नें वह डरावनी आवाज़ें सुनी। तभी अचानक किचन से कुछ आवाज़ आई,,, मैंने माँ को पूछा की तुम नें कुछ गैस पर रखा है? माँ नें कहा की कुकर मै दाल पक रही है। मै दौड़ कर किचन में गया तो मेरी रूह काँप गयी,,, कुकर हवा में था और गैस बंद था। यह खौफनाक नज़ारा देख क...