मुर्दा बना प्रेत – खौफ की एक सच्ची कहानी | Murda Bana Pret

murda-bana-pretमेरा नाम भावेश लोढारी है, और में खारवा जाती से हूँ। मेरा जन्म तो बखरला गाँव में हुआ था पर अब मै वेरावल सिटि में रहता हूँ। करीब छे महीने पहले की बात है, मेरी नौकरी छूट गयी थी और मेरे पास खाने-पीने के पैसे भी नहीं बचे थे। हालत इतनी बुरी थी की कई जगह से उधार ले कर खानें पीने का खर्चा चलना पड़ रहा था। उन दिनों कुछ भी कर के मै पैसे कमाने के लिए तैयार था। पैसों की तंगी की वजह से मै इतना depressed था की सही-गलत का फर्क भी मीट चुका था। अपनी उसी कंगाली के दौर मै एक बार मौत के मुह में जा पहुंचा था।

करीब छे महीने पहले की बात है,,, मेरा पड़ौसी मनसूख़ मेरे घर आया। उसनें मुझ से कहा की यार पैसे कमाने का एक आइडिया है। मैने कुछ भी पूछे बिना मनसूख़ को हाँ बोल दिया। मैंने उसे कहा की काम कुछ भी हो पैसे मिलने चाइए। अच्छाई बुराई भाण में गयी। पेट में आग लगती है तो रोटी से ही आग बुझती है, आदर्शों से नहीं।

मनसूख़ नें कहा की,,,, आज रात 12 बझे तैयार रहना। तीन घंटे का काम है और 5000 मिलेंगे। आधे तेरे और आधे मेरे। मैंने डील डन कर दी। उस रात मनसूख़ रिक्शा ले कर ठीक 11.30 को मेरे घर आ गया। मै भी कुछ भी सोचे बिना उसकी रिक्शा में सवार हो गया। मैंने देखा की रिक्शा में फावड़ा, कुल्हाड़ी और अन्य खुदाई के औज़ार थे।

मैंने हस्ते हुए मनसूख़ को बोला की भाई किसी का खून करने तो नहीं जाना है ना,,,?

मनसूख़ बोला की,,, ना रे,,,,  चिंता मत कर मै हूँ ना,,,  कुछ लफड़ा नहीं होगा।

थोड़ी ही देर में मनसूख़ नें रिक्शा एक कब्रिस्तान के पास रोक ली। फिर मुझे कहा की चल फावड़ा और कुल्हाड़ी लेले हमें अंदर जाना है। हम दोनों दीवार कूद कर अंदर गए। मुझे काफी डर लग रहा था। मनसूख़ एक ताज़ी दफन की हुई कब्र पर आ कर रुक गया। और मुझे बोलनें लगा की इसे खोदना है। उसकी बात सुन कर मेरे तो हौश उड़ गए। मै भाग कर कब्रिस्तान से बाहर आ गया।

रिक्शा के पास खड़े हो कर मनसूख़ नें समजाया की सीधे काम के कोई एक दिन में 5000 नहीं देता है। अगर तुझे यह काम नहीं करना है तो निकल यहाँ से,,, मै किसी दूसरे को ढूंढ लूँगा।

कुछ देर सोचा फिर,,, मुझे खयाल आया की वैसे भी जो मर चुका है वह तो मर ही चुका है,,, उसकी लाश का कोन क्या करेगा उस से अब किसी को क्या फर्क पड़ेगा। वैसे भी अगर कुछ कर के पैसे नहीं कमाए तो मेरी लाश भी किसी गटर के पास पड़ी होगी।

थोड़ी ही देर में हिम्मत कर के, मै उस घिनोने और गलत काम के लिए राज़ी हो ही गया।

कुछ ही देर में हमनें उस कब्र को खोद कर लाश बाहर निकाल ली,,, वह एक आधेड़ उम्र की औरत की ताज़ी लाश थी,,, जिसे शायद उसी दिन सुबह में दफनाया गया होगा। उस लाश की बदबू सिर फाड़ देने वाली थी। जैसे तैसे कर के हमनें उसे रिक्शा में डाला। और खाली कब्र मिट्टी से ढक डाली।

उसके बाद जल्दी से हम दोनों भाग कर रिक्शा की और गए। रिक्शा के अंदर देखा तो हमारी जान निकल गयी, वहाँ रिक्शा से लाश गायब थी। यह अजीब घटना देख कर मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए। मैने मनसूख़ को बोला की, यार भाग चलते हैं, मनसूख़ भी बोला की हाँ यार यह तो भूत-प्रेत का मामला लगता है।

हम दोनों फौरन उस जगह से भागने लगे, मनसूख़ नें फौरन रिक्शा चालू करना शुरू किया, पर उसकी रिक्शा चालू हों तब हम वहाँ से भागें ना,,,

अचानक हमारी नज़र कब्रिस्तान की और गयी,,, हमनें देखा की वह मुर्दा औरत अपनी कब्र पर बैठी थी। ओर हमारी और देखे जा रही थी। अंधेरे में साफ दिख तो नहीं रहा था पर पक्का अंदाज़ था की वहाँ पर वही मिट्टी सनें लाल कपड़ों वाली औरत थी जिसे हमनें खोद कर निकाला था। एक लाश को इस तरह अपनी कब्र पर बैठा देख कर हम दोनों की सिट्टी-पिट्टी गुल हो गयी।

हम दोनों रिक्शा छोड़ कर ही वहाँ से भाग निकले,,, और सुबह उजाला होते ही हम रिक्शा वहाँ से खींच कर वापिस ले आए। उस दिन मैने तो कसम खाली की,,, भूख से मर जाऊंगा पर पैसों के लिए ऐसा खतरनाक और घिनोना काम नहीं करूंगा।

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