देवनगरी जो कुछ पलो में भूतनगरी में तब्दील हो गयी , केदारनाथ तबाही की कहानी इंडियन घोस्ट स्टोरीज की ज़ुबानी
माटी पूछे कुम्हार से ,क्यू रोंदे तू मोय , एक दिन ऐसा आएगा , मै रोंदुगी तोय
मित्रो ये दोहा उत्तराखंड त्रासदी पर चरितार्थ होता है | जैसा आप जानते है कि 16 और 17 जून 2013 को उत्तराखंड में आयी बाढ़ में हजारो जाने चली गयी | कई परिवारों को इस त्रासदी के एक साल पूरा होने पर भी अपने प्रियजनों का पता नहीं चला | देश के चार धामों में गिने जाने वाले केदारनाथ धाम में केवल भोलेनाथ के मंदिर को छोड़ सब तबाह हो गया | इस त्रासदी पर मै आपको इस घटना पर पुरी कहानी संक्षेप में बताने की कोशिश करूंगा और कुछ पहलुओ को भी उजागर करूँगा |
आज से पन्द्रह साल पहले मैंने अपने पुरे परिवार के साथ केदारनाथ सहित चार धाम यात्रा की है इसलिए मेरे जेहेम में आज भी वहा की तस्वीरे है कि इतने खुबसुरत जगह कैसे एक उजाड़ में बदल गयी | इतनी कठिन चढाई के बाद आप नाथ के दर्शन कर पाते है |इतनी उचाई और ठण्ड होती है कि चलना मुश्किल हो जाता है |मैंने कभी सोचा भी नहीं कि ऐसी प्राकुर्तिक आपदा भी आ सकती है|
हमेशा श्रुधालुओ से भरा रहने वाला केदारनाथ आज उन्ही लोगो की चिताओं से भरा हुआ है | हर तरफ बिखरी लाशें जिन्हें पहचानना मुश्किल ही नहीं नामुन्किन हो गया है | कितने लोग आज भी अपने घरो पर उनके आने का इंतज़ार कर रहा है | उन लापता लाशो को अपने परिवार से अंतिम विदाई भी नसीब नहीं हुई | सेना के जवान आज भी लगातार वहा महामारी से बचने के लिए रोज़ कई लाशो को मुखाग्नि दे रहे है |उन लोगो की लाशो से मिले फ़ोन,कपड़ो ,जूतों और डी एन ए से उनकी पहचान की जा रही है | ये सब कैसे और क्यू हुआ आइये जाने |
उत्तराखंड में केदारनाथ घाटी में 16 और 17 जून बादल फटने से पुरी केदार घाटी में बाढ़ आ गयी | पानी का प्रवाह इतना तेज़ था कि वो सब कुछ बहा ले गया | एक चट्टान की वजह से केदारनाथ मंदिर बच गया बाकि पुरी केदार भूमी कुछ ही पल में एक वीराने में तब्दील हो गयी | इस तबाही में ना केवल केदार भूमी अपितु इसके रास्ते में आने वाली हर चीज को बहा ले गया |
इस पुरे कवरेज को मीडिया, न्यूज पेपर और दुसरे माध्यमो से पुरे विश्व में बताया गया | इस पुरे मंजर को देखकर घर बैठे लोगो की आँखे भर आयी | इस बाढ़ में तबाह हुई जिन्दगियों के लिए केंद्र सरकार ,राज्य सरकारों ,स्वयंसेवक संस्थाओं ने अनुदान किया | इस पुरी तबाही को अलग अलग लोग अपने मतों को रखते है | सेना के जवानों ने रात दिन एक आकर इस त्रासदी में फसे लाखो लोगो को मौत के मुह से निकाला है |
अब लोगो में मन में ये सवाल पैदा होता होगा कि क्या चार धाम करना सही है या नहीं ?? कोई फिर से केदारनाथ आना चाहेगा ???
मै आप लोगो से कहना चाहता हु कि अपनी आस्था को कम मत होने दीजिये | मुझे ये बताये कि अगर किसी भी तीर्थ स्थल,मंदिर ,मस्जिद ,गुरुद्वारा किसी भी प्राकुर्तिक आपदा (बाढ़ ,भूकंप ,सुनामी ,बम विस्फोट )का शिकार हो जाए तो क्या भारत जो कई सदियों से अपनी इसी आस्था के कारण पुरी दुनिया में मशहुर है क्या आप उसे ख़त्म कर देंगे |
अगर इश्वर ने मौत लिखी तो घर बैठे भी मौत आ सकती है | क्या पता हम अगली सुबह देख पावे या नहीं |घर में मरने पर इंसान के घर वाले घर नहीं छोड़ देंगे उसी प्रकार क्या एक विपत्ति को देख इश्वर को मानना छोड़ देंगे | ये तो तीर्थ स्थान था और अगर यही मंजर आपको पर्यटन स्थल मसूरी ,शिमला ,नैनीताल जैसे पहाडी स्थानों पर होता तो इसका जिम्मेदार कौन होता | इसे भी इश्वर का प्रकोप समझेंगे | उन लोगो से पूछे जिनके परिवार के सदस्य इस बाढ़ में घर लौटकर आये वो प्रभु को पूज रहे है |
आप सोच रहे होंगे कि भूत की कहानिया लिखने वाला आज भगवान् की बाते कैसे कर रहा है क्यूंकि इन्सान और शैतान के बीच की कड़ी भगवान है | भगवान ने ही सृष्टी बनाई है और वो ही इसको ख़त्म कर सकता है | इसलिए यह लेख पढ़ते वक़्त इश्वर,अल्लाह,येशु और वाहे गुरु से यही दुआ करते है कि ऐसी विपत्तियों से हमें और हमारे परिवार को बचावे और आपके प्रति आस्था को कम ना होने देवे |
“उत्तराखंड त्रासदी में जान खोने वाले श्रधालुओ की आत्मा की शान्ति के लिए प्रार्थना और लाखो लोगो की जान बचाते वक़्त अपनी जान खोने वाले शहीदों को नमन “
शिव को मत दोष दे ऐ बेगैरत इंसान , दुषकर्मों का मिल रहा है ये तुझको ईनाम
शीश झुका मैं कर रहा था अपने शिव का ध्यान ,तब चुपके से आया था वो नरभक्षी हैवान
आफत में जब पडी हुई थी उन लोगों की जान,मानवता को कुचल रहे थे तब भी कुछ शैतान
पर्वत नदीयाँ वृक्ष धरा ही हैं असली भगवान ,इनकी रक्षा करके ही अब बच सकती है जान
मेरा आपसे ये अनुरोध है कि अगर ये लेख आपको अच्छा लगे तो प्लीज् इस लेख पर अपने विचार कमेंट[सबसे नीचे स्क्रॉल करने पर] के जरिये और शेयर कर पुरे देश की जनता तक पहुचाने की कृपा करे ताकि इंडियन घोस्ट स्टोरीज इसी तरह पाठको को अपने पाठको तक अपनी बात पंहुचा सके |
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