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Showing posts from August, 2013

घुटन :- एक बेचैन कर देने वाली दास्तां

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आप सभी पाठको का फिर से स्वागत है मित्रो , दोस्तों हमारे शास्त्रों में हमेशा ये कहा गया है कि जब भी हम जीवन के कोंई महत्वपूर्ण काम करे तो पुरे विधि विधान के साथ सम्पन्न करे, तो उसका परिणाम हमे शुभ और मंगलकारी ही मिलते है , लेकिन अगर हम इन महत्वपूर्ण कार्यो में हम अपनी मनमानी करने से बाज़ नहीं आते तो इसके हमे काफी विपरीत और भयानक परिणाम महसूस करने और देखने को मिलते है,हमारे पूर्वजो से आपने ये परंपरा तो सुन ही रखी होंगी, की विवाह,मकान,गाड़ी,पशुधन आदि आदि,,,   ये सभी काम मुहुर्त देखकर ही करने चहिये|     आज मेरा ये वृतांत इसी पर ही है,,, दोस्तों सुनिये , ये बात काफी पुरानी है शायद १९९१ से १९९२ के लगभग की घटना है, हमारे पड़ोस में एक किरायेदार रहा करते थे, उनकी सर्विस ” टू व्हीलर ” कंपनी में एक मैकेनिक की थी उनकी प्रवृति नास्तिक थी, और उनकी पत्नी और बच्चे काफी धार्मिक थे उनके बीच में हमेशा इसी बात को लेकर झगड़ा होता था कि जब भी कोंई धार्मिक समारोह होता जैसे कोंई साधू संत का प्रवचन होना हो या कोंई झांकी को,  या फिर पड़ोस में किसी के भी यहाँ भजन मंडली का कार्यक्रम हो तो उनकी पत...

एक ऐसी परम्परा जो मरने के बाद परिजनों से कराती लाश की दुर्दशा Sky Burial in Tibet

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तिब्बत देश की एक परंपरा Sky Burial के अनुसार मृतकों के क्रियाकर्म की अनोखी  और प्राचीन प्रथा प्रचलन में थी जिसके अनुसार मृत व्यक्ति के शरीर के छोटे-छोटे मांस  के टुकड़ों को चाय और याक के दूध में डुबो कर उन्हें भूखे गिद्धों के सामने परोस दिया जाता थाजिसे कोई और नहीं बल्कि मृतक के परिजन कूद  ही करते थे. एशियाई देशो में लाश को दफनाना, जलाना, नदी में बहाना  ये तो हमें पता है लेकिन लाश के टुकड़े करके उसे गिद्धों के सामने डाल देना वाकई अविश्वसनीय और आश्चर्यजनक है. इस प्रथा में एक और चीज आपके होश उड़ा देगी कि यह लोग मृतक के मांस के टुकड़े तो गिद्धों को डालते ही थे साथ ही जब गिद्ध मांस के टुकड़े  खाकर उड़ जाते थे तो बची हुए हड्डियों को भी कूटकर दुबारा कौवों और बाज को खिलाते थे. मौत के बाद  होने वाली शवों की ऐसी दुर्दशा को तिब्बतवासी एक परंपरा मानते हैं. उनका ऐसा मानना है कि ऐसा करने से मृतक जल्दी भगवान के पास पहुंच कर दूसरा जन्म लेता है. इसके पीछे दूसरी मत यह भी है कि तिब्बत की जमीन पथरीली है इसलिए वहां जमीन में दफनाना थोड़ा मुश्किल काम होता है साथ ही जलावन सामग्री  और ऊर्जा की कमी की वजह से यह प्रथा...

एक ऐसा कब्रिस्तान Capuchin Catacombs जिसने शवो को पिछले 500 सालो से जीवित रखा है

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प्राचीन इटली निवासियों की परंपराएं Capuchin Catacombs जितनी प्राचीन हैं उससे कहीं ज्यादा ये तत्कालीन समाज में हुए  रहस्यमयी और अलौकिक मान्यताओं को पेश  करती हैं. इटली के सिसली नगर में कापूचिन कैटाकॉम्ब Capuchin Catacombs नामक एक ऐसा कब्रिस्तान है जहां शवों को दफनाया नहीं जाता था बल्कि उनकी ममी बनाकर उनको दीवारों पर लटका दिया जाता था. शवों पर इस प्रकार के  रासायनिक पदार्थ लगा दिए जाते थे जिसके कारण वह ना तो खराब होते हैं और ना ही दुर्गंध छोड़ते हैं यहा पर सन 1500 से लेकर 1920 तक की  लगभग 8000 ममी का संग्रह है सिल्वेस्ट्रो ऑफ गूबियो 1599 में ब्रदर सिल्वेस्ट्रो ऑफ गूबियो की ममी बनाने के साथ यह सिलसिला शुरू हुआ था जो की यहाँ की सबसे पुरानी ममी है | इस कब्रिस्तान की कहानी जितनी डरावनी है यहां पहुंचने का रास्ता भी बहुत भयानक है. कोई कमजोर दिल का व्यक्ति शायद अपने जीवन में यहां जाने की कल्पना भी नहीं कर सकता | एक अंधेरे रास्ते से गुजरती सीढ़ियां आपको इस कब्रिस्तान तक पहुंचाती हैं Teacher’s Department कब्रिस्तान के दरवाजे पर साफ तौर पर लिखा गया है कि यहां आने वाले, अपनी सभी उम्मीदें छोड़ दें ज...

तड़पती रूह -एक अनहोनी और असाधारण घटना

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इस मंच पर एक बार फिर से आपका स्वागत है दोस्तों , आज में आपको एक किस्सा और सुनाता हूँ , दोस्तों, कुदरत के आगे किसी नहीं चलती तो कुदरत अपने नियमो में फेरबदल भी किसी के लिए नहीं करती, लेकिन कुदरत के करिश्मो से इनकार भी नहीं किया जा सकता, इस सरज़मीं पर जब भी कुछ अनहोनी या असाधारण घटनाएं होने वाली होती है तब-तब जानवरों पशु-पक्षियों में हलचल शुरू हो जाती है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है की कुदरत ने अपने नियमो में बदलाव किया है तों ऐसी ही एक अनहोनी और असाधारण घटना आपके सामने रख रहा हूँ सुनिये… किसी गाँव में एक पठान और उसका हँसता खेलता परिवार रहा करता था, भेड़- बकरिया चराकर अपना और अपने परिवार का गुजारा जैसे-तैसे कर लेता था, मगर उसका मुख्य व्यवसाय खेती था ,इसके लिए समय पे बुवाई करना और खाद-बीज डालना जरुरी है , और इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण बात बारिश का सही मात्रा में होना भी, कम और अधिक वर्षा दोनों ही फसले बर्बाद कर देती है, दो- तीन सालोँ तक उसको कम और उससे भी कम आमदनी हुई, इस कारण वो समय बुवाई भी नहीं कर सका, उसकी क़िस्मत ने उसको धोखा दिया जिस साल उसने बुवाई नहीं की उसी साल अच्छी बारिश हुई | अब...

मिस्त्र में ममी बनाने की कहानी , इंडियन घोस्ट स्टोरीज की ज़ुबानी The Story of Mummy Making

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ममी बनाने Mummy Making की प्रक्रिया बेहद खर्चीली होती है। यही कारण है कि पहले राजसी परिवारों में इसका खूब चलन था। इसके अलावा समृद्ध वर्ग ही ममी बनवाने के बारे में सोच सकता था उन दिनों ममी बनाने में लगभग 70 दिन का समय लगता था और इसे बनाने के लिए धर्मगुरु और पुरोहितों के साथ-साथ विशेषज्ञ की एक टीम बनाई जाती थी जो इस काम को अंजाम देते थे| ममी बनाने के लिए सबसे पहले मृत शरीर की पूरी नमी व द्रव को समाप्त कर लिया जाता था, इस काम में कई दिन लग जाते थे। शरीर से नमी समाप्त होने के बाद उस पर कई प्रकार के लोशन, तेल और कई तरह के रोगन से मालिश की जाती थी। फिर पट्टियां लपेटने का काम किया जाता था और पूरे शरीर पर पतले कॉटन की परत-दर-परत पट्टियां लपेटी जाती थीं। पट्टी लपेटने के बाद शरीर के आकार से मिलते-जुलते लकड़ी के ताबूत तैयार किए जाते थे। जिसके उपरांत इन ताबूतों को रंगकर मृत व्यक्ति या पशु के चेहरे सहित उसका रूप दिया जाता था। जिसके बाद धर्मगुरु के कहने पर इस पर धार्मिक वाक्य लिखे जाते थे और एक धार्मिक समारोह करके ताबूत को शरीर समेत चबूतरे पर सम्मान के साथ रख दिया जाता था।  आज भी मिस्र व दुनियां के ...

Anjaan Rahe - Which Changes Your Future Life

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Main Aayi Tune Yaad Kiya ,Par Rona To Hai Tujhe Kyu Mujhe Bulaya   Ab Aafat Ka Hoga Manjar Tere Daman Main, Main hu Teri kismat, Main Hu Teri Kismat   Is Ajeebo Gareeb Duniya Main Aap Sabhi Pathako Ka Fir Se Tahe-Dil Se Istakbal Hai Dosto , Duniya Ke Har Tabke Har jaati Main Is Rahsyamayi Duniya Ki Anjaan Taktoo ka Jikra hua hai… Ghatna Chahe Koi Bhi Ho Wo Toh Bas Unki Duniya Hone Ka Aehsaas Hamesha karaati Rehti Hai , Dosto Aapne Tantra Mantra or Tone Totko Ke Baare Main Suna Hi Hoga , Dosto Aapne Hamesha Yeh Baat Notice Ki Hogi Aksar Chaurahe Par Matki , Jalta Hua Diya , Ya Mithai Ya Tasveere Rakhi Hui Dekhi Hogi Dosto Inke Peeche Aapne Apne Anubhavi Dadi Aur Bujurrgoo Se Yeh Kehte Hue Suna Hoga Ki Yeh Kisi Ka Utara Hai Ya Kisi Or Ki Balaaye Hai Jo Yaha Par In Anjaan Chauraho Par Rakh Di Jaati Hai… Dosto In Sabhi Utaaro Se Hame Hamesha Door Rehna Chahiye Kyuki Yeh Kisi Or Ki Musibate Yaha Utaare Ke Roop Main Daal Di Jaati Hai Or Agar Koi Bhi Isse Thokar Marta Hua...

Merei Saheli Lazia Ka Saaya

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Dosto aaj main aapke liya fir se ek sansani ahsaas laane ja raha hu ise dhyan se mehsus karna taki aapko maloom ho sake is duniya ke uncchooe Aur ajeeb rahasymay duniya.Dosto aaj main aapko ek aisi ghatna batane ja raha hu jo mere dost ki bahan ke saath ghatit hui hai jaisa mere dost ne mujhe bataya wesa hi aapko batane ki koshish karne ja rha hu. To pehle main aapko mere dost ke baare main batana chahta hu mera ek dost (Tarun) hai wo bahut hi hasmukh aur  majaaki hai.. uski ek bahin hai(Sondarya) jo usse choti hai , uski kisi “Lazia” naam ki ladki ke saath dosti thi wo dono main gehri dosti thi , Lazia ho ya sondarya dono main koi bhi kahi kisi kaam ke liye nikalata to dono har baat ek dusre ko batate the sondarya har kaam ko karti thi jo Lazia usse bolti or Lazia ki bhi yahi aadat thi ,Lazia ko ghar se bahar jaane ki anumati bahut hi kam mil paati thi kyuki uske parents bahut strict the, isliye khane pine ki cheeze bhi sondarya se mangwati thi , or Sondarya  ghar pe uske k...