अंतिम संस्कार के कुछ ऐसे रिवाज ,जिसे देखकर आपकी रूह काँप जायेगी Bizarre Death Rituals from Around the World
क्या आप जानते हैं कि इंसानों ने मृत शरीर के अंतिम संस्कार की परंपरा कब शुरु की और क्यों मरने वाले के अंतिम यात्रा के तरीकों में इतनी विविधता पाई जाती है। अगर आपके पास इन सवालों का जवाब है तो हमें जरुर बताएं। अपनी इस कड़ी में हम आपको बताने जा रहे हैं दुनिया के ऐसे दस अंतिम संस्कारों Bizarre Death Rituals from Around the World के बारे में जो बेहद विचित्र या कहिए अनोखे हैं।
टॉवर्स ऑफ साइलेंस Tower of Silence
जोरोस्ट्रीयन नामक एक पंथ की मान्यता है कि मृत शरीर अशुद्ध होता है इसलिए इसे गाड़ने या जलाने से बाकी चीजें भी प्रदूषित होती हैं। अपनी इसी मान्यता के कारण वो मृत शरीर को एक टावर पर लटका देते हैं। चील-कौओं के खाने के बाद बचे हुए हिस्से को धूप में सूखने दिया जाता है। इसके बाद बची हुई हड्डियों को चूने में गला देते हैं। जिस खंभे पर शरीर को लटकाया जाता है उसे ही टॉवर्स ऑफ साइलेंस कहते हैं। माना जाता है कि जोरास्ट्रीयन, इस्लाम की प्राचीनतम शाखा है जिसमें से इस्लाम और ईसाई धर्म निकला है।
ट्री बेरीअल Tree Burial- Bizarre Death Rituals from Around the World
आस्ट्रेलिया के आदिवासी मरे हुए व्यक्ति को पेडों पर लटका देते हैं। जोरोस्ट्रीयन की ही तरह वो अपने संबंधियों के मृत शरीर को जानवरों के खाने के लिए छोड़ देने में विश्वास करते हैं।
तिब्बतन स्काई बेरीअल Tibetan Sky Burial
तिब्बती परंपरा में माना जाता है कि अगर मृत शरीर को गिद्ध जैसे जानवर खाएं तो उनके उड़ान के साथ ही मृत आत्मा भी स्वर्ग पहुंच जाती है। इसलिए वो लाश को टुकडों में काट कर उसके आस पास दूध और खाने की अन्य चीजें बिखेर देते हैं जिससे गिद्ध आकर उस शरीर को खा सकें।
बेरीअल इन ए बॉग Burial in a Bag
मृत शरीर को हमेशा के लिए सुरक्षित रखने हेतु मध्यकालीन यूरोपवासी उसे दलदल में दबा देते थे। हजारों साल बाद यूरोप के इन दलदलों से कई लाशें बरामद की गईं जिन्हे एक विशेष संग्रहालय में रखा गया है।
बर्निंग द विडो Burning the Widow
औपचारिक तौर पर भारत में इस परंपरा को अब मृत या समाप्तप्राय माना जाता है लेकिन अभी भी कई बार ऐसी घटनाएं सुनने में आती हैं कि मरे हुए पति की चिता में उसकी पत्नि को भी जिंदा जलने के लिए छोड़ दिया गया। सती प्रथा नामक इस परंपरा को देश के कानून में अपराध घोषित कर दिया गया है।
बरी मी वंस, बरी मी ट्वाइस Bury me Once , Worry me Twice
मेलनेशिया के ट्रोब्रायंड आइलैंड पर रहने वाले आदिवासी, मृत शरीर का अंतिम संस्कार दो बार करते हैं। पहले तो उसे दफनाते हैं और गल जाने के बाद हड्डियों को निकाल उसे बर्तनों का आकार देते हैं। इस बर्तन के आकार की हड्डी को वो एक गुफा में रख देते हैं जिससे वो अपने बच्चों को बता सकें कि ये उनके पूर्वजों के अवशेष हैं।
बर्न विद डॉग Burn with Dog
सेंट्रल मेक्सिको में पाई जाने वाली एक प्रजाति ऐज्टेक अपने संबंधियांे का दाह संस्कार अनोखे ढंग से करती है। अगर उन्हे लगता है कि मरने वाला व्यक्ति बुरा था या उसकी मौत कष्टमय ढंग से हुई है तो उस शरीर के साथ एक कुत्ते को जलाते हैं। उनकी मान्यता है कि इस कुत्ते के साथ ही मरने वाले इंसान की सारी बुराईयां भी समाप्त हो जाएंगी।
हैंगिंग आउट विद ग्रैंडपा Hanging Out with Grandpa
चीन के दक्षिण-पश्चिम हिस्से की यात्रा के दौरान आपको एक अजीब सा मंजर देखने को मिल सकता है। दरअसल, यहां के निवासी अपने मृत संबंधियों के ताबूत को पेड़ों पर टांग देते हैं। माना जाता है कि ताबूत को कम से कम 10 मीटर की ऊंचाई पर टांगा जाना चाहिए। हालांकि कुछ ताबूतों को 130 मीटर तक की ऊंचाई पर भी टंगा हुआ देखा जा सकता है।
कैनबलिजम Cannibalism
अमेजन की घाटी में रहने वाले आदिवासियों के अंतिम संस्कार की परंपरा बेहद चौका देने वाली है। वो मृत शरीर को आग में भून कर उसको खा जाते हैं। उनका मानना है कि मरने वाले व्यक्ति के प्रति प्रेम दिखाने का ये सबसे बेहतर तरीका है।
डांसिंग विद ग्रैंडमा Dancing With Grandma
मेडागास्कर वासी मानते हैं कि व्यक्ति तब तक नही मरता जब तक उसका शरीर पूरी तरह समाप्त न हो जाए। इस परंपरा के मुताबिक वो मृत शरीर को दफनाने के बाद जब वो पूरी तरह गल जाती है तो उसे फिर से खोदते हैं। बचे हुए हिस्से को सिल्क के चादर में लपेट कर उसके साथ नाच गाना करते हैं और शराब भी पीते हैं। इस जस्न के पीछे उनकी मान्यता है कि ये मृत व्यक्ति का पुर्नजन्म है।
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