शिमला के भूतो को जिन्दा किया मीनाक्षी चौधरी ने अपनी किताबो में

Ghost Storiesof Shimla Hills copyशिमला। क्या किसी खूबसूरत वादी से गुजरते वक्त या बर्फ से ढ़की सड़क पर चहलकदमी करते वक्त आपको ऐसा महसूस होता है कि प्रेत का कोई साया आपका पीछा कर रहा है? आपको ऐसा महसूस हो या न हो, पर मोहक छवियों से लैस शिमला में ऐसे लोगों की कमी नहीं जो शहर में प्रेतात्माओं की आवारागर्दी के एक से बढ़कर एक दावे करते हैं। अब इन तमाम भुतहा कहानियों को एक किताब की शक्ल दी गई है।

 

पत्रकार और लेखिका मीनाक्षी चौधरी इस रोचक किताब की लेखिका हैं। उन्होंने इससे पहले भी शिमला की भुतहा कहानियां पाठकों को परोसी हैं, जिन्हें खूब पसंद किया गया था। वह दार्शनिक अंदाज में कहती हैं कि शिमला में भूतों और चुडै़लों की कहानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं, फिर मैं इन कहानियों को क्यों न दर्ज करूं? कोई किसी इलाके में किसी अंग्रेज नर्स की आत्मा के भटकने का दावा करता है तो किसी का दावा है कि अमुक इमारत में अब भी अमुक गोरे साहब की आत्मा भटकती है। ऐसी कहानियों की यहां भरमार है।

 

उनका कहना है कि शिमला के स्थानीय लोग शाम ढ़लते ही ऐसी कहानियां सुन-सुनाकर एक-दूसरे के अंदर रोमांच और सिहरन पैदा करने में मशगूल हो जाते हैं। भुतहा कहानियां यहां की संस्कृति और किस्सागोई का अभिन्न हिस्सा हैं। ‘मोर घोस्ट स्टोरीज फ्रॉम शिमला हिल्स’, जो रूपा एंड कंपनी से प्रकाशित हुई है, का लोकार्पण पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने किया। ये कहानियां अंग्रेजी औपनिवेशिक काल की भुतहा या सुपरनेचुरल कहानियां हैं, जिन्हें बड़े चाव से लोग सुनते और सुनाते हैं।

 

वर्ष 1864 से 1939 तक देश की ग्रीष्मकालीन राजधानी रहे शिमला की वादियों में भूतों की आवारागर्दी का दावा करने वालों की कमी नहीं है। 11 किताबें लिख चुकीं मीनाक्षी कहती हैं कि जब मैंने शिमला के भूतों पर अपनी पहली पुस्तक ‘घोस्ट स्टोरीज फ्रॉम हिल्स’ के लिए कहानियां जुटाने के लिए 2003 में शिमला का चक्कर लगाया था, तो मुझे बड़ी संख्या में ऐसे लोगों से मिलने का मौका मिला जिनके पास एक से बढ़कर एक भुतहा कहानियां थीं।दूसरी बार जब फिर कहानियां जुटाने के लिए मैं लोगों से मिली तो उन्होंने मेरी पहली भुतहा किताब की जमकर तारीफ की, पर उनकी यह शिकायत भी थी कि इसमें अमुक भुतहा कहानी दर्ज नहीं हुई है। मुझे लगता है कि शिमला की वादी भुतहा कहानियां का रोज ही प्लॉट गढ़ती है।

 

शिमला की पूर्व पत्रकार व लेखिका मीनाक्षी चौधरी कंवर का। उनकी तीन महीने पहले रिलीज हुई किताब ‘घोस्ट स्टोरिस एण्ड मोर’ में उन्होंने लोगों के भूतों व प्रेतों के साथ के सच्चे अनुभव को अपनी इस किताब में लिखा और यह सब बातें इन्होंने शनिवार को यूटी गेस्ट हाउस में शेयर की।मीनाक्षी ने कहा कि यह मेरी लिए बहुत मुश्किल था, मैं जब भी इसके लिए शिमला के लोगों से बात करने निकलती तो लोग मुझे चुड़ैल करते, यहां तक कि मेरे पीछे कुत्ते छोड़ देते थे।

 

भूतों-प्रेतों पर कहानी लिखने के लिए जब में लोगों के घरों में उनसे बात करने जाती तो लोग बिना बात किए दरवाजा बंद कर देते थे। कई लोगों ने तो मुझ पर यह तक इलजाम लगाया कि मैं कहीं पाकिस्तान की जासूस तो नही हूं। इसके लिए मुझे अपने आप को सही प्रूव करना पड़ा।मीनाक्षी चौधरी ने बताया कि उक्त सभी परिस्थितियों को झेलते हुए मैंने इस किताब में लोगों के साथ घटित भूतों की सच्ची घटनाओं को किताब में मुख्य जगह दी। वहीं ‘सनशाइन’ किताब के बारे में मीनाक्षी ने बताया कि इसमें उन्होंने अपने ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित होने के पर्सनल एक्सपीरियंस को शेयर किया है। इसके माध्यम से यह बताने का प्रयास किया है कि अगर आपका प्यार आपके साथ है तो दुनिया की हर मुश्किल व तकलीफ का सामना अच्छे से किया जा सकता है।

 

मीनाक्षी का कहना है कि शिमला और इसके आसपास की पहाडिय़ां भूतों के लिए उपयुक्त वातावरण पैदा करती हैं। जंगल, अंधेरी रातें और गहरी धुंध जो पहाड़ों और घाटियों में घिर आती हैं, के साथ-साथ दूर जंगल से आने वाली अजीब-अजीब आवाजें यहां भूतों के होने का अहसास कराती हैं। किताब की कहानियां शिमला और आसपास के क्षेत्रों के उन भूत-प्रेतों की दास्तान हैं जो यहां के जनजीवन का हिस्सा बन चुकी हैं। मीनाक्षी के अनुसार जब मैंने शिमला के भूतों पर पहली किताब लिखी थी तो लोग मुझे हैरानी से देखकर पूछते थे कि इस जमाने में भला भूत कहां होते हैं? लेकिन तब और अब में मुझे जमीन आसमान का अंतर नजर आ रहा है। इस बार मुझे भूतों की कहानियां तलाशने में कोई दिक्कत नहीं हुई। कितने ही लोग ऐसे मिले जिन्हें न सिर्फ पहली किताब पसंद आई थी बल्कि उन्हें यह शिकायत भी थी कि मैंने कई कहानियां पिछली किताब में छोड़ दी। मुझे लगता है कि मेरी नई किताब से इन लोगों की शिकायत दूर हो जाएगी।

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