एक ऐसा देश ,जहा आत्माओ को पुतले में बुलाकर की जाती है बात

पुतले के निचले हिस्से में लिखने के लिए पेंसिल या चॉक लगाई जाती है। कमरे में ऐसी खामोशी रहती है, जैसे अंतिम संस्कार हो रहा हो। अगरबत्ती जलाने के साथ ये खेल शुरू होता है। ग्रुप का लीडर पुतले के सामने बैठकर मंत्र पढ़ना शुरू करता है। वहां से गुजर रही आत्मा के पुतले में प्रवेश करने पर उसका वजन बढ़ जाता है। फिर शुरू होता है सवालों का सिलसिला। तुम्हारा नाम क्या है? इसके साथ ही पुतला पास में रखे कागज की तरफ सरकता है और अपना नाम लिखता है। इसी तरह किसी के भी बारे में सवाल-जवाब किए जाते हैं।
कहते हैं कि लीडर का माहिर होना जरूरी है। अगर वह पुतले में से आत्मा को निकालने में नाकाम रहा या फिर आत्मा नाराज हो गई तो उन लोगों को काफी नुकसान पहुंचा सकती है। फिर भी सवाल ये उठता है कि क्या जेलंगकुंग वाकई कोई शक्ति है। या फिर चालाकी से कोई और तरीका इस्तेमाल किया जाता है।

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