एक शापित बस्ती , जहा मौत भी आ जाए , तो कोई मदद नहीं करता Cursed Nazarwadi Chawl
मित्रो आज सभी को पता है कि हम आप लोगो तक हमेशा नयी और रोचक कहानिया पहुचाते है | इसी भूतहा कहानियों की कड़ी में हम आपको एक ऐसी बस्ती Cursed Nazarwadi Chawl की सच्ची घटना बतायेंगे जहा मौत भी आ जाए तो कोई इंसान मदद नहीं करता है | हमारा पाठको से निवेदन है कि अगर आपको हमारे ब्लॉग की कोई भी कहानी पसंद आये तो उसे शेयर करना ना भूले और अपने विचार कमेंट में जरुर लिखे ताकि हम अपने लेखो में सुधार कर सके |
मित्रो हम मुंबई के नजरवाडी मोहल्ले की बात कर रहे है | स्थानीय लोगो ने इस चाल का नाम नजरवाडी चाल रख रखा है और इस चाल के बारे में मुंबई के बहुत कम लोगो को पता है | इस चाल में घटी एक घटना हम आपको बताना चाहते है जिससे इस चाल को शापित माना जा सकता है | शायद आप इस किस्से पर यकीन ना करे लेकिन ये सच्ची घटना है |
कुछ साल पहले की बात है एक दिन अमोल अपनी गर्भवती पत्नी को अस्पताल ले जा रहा था और रास्ते में इस चाल के करीब इनकी गाडी खराब हो गयी थी | वो सड़क रात को एक दम सुनसान रहती है और रात को वहा से कोई नहीं गुजरता है | बेचारे अमोल का मोबाइल नेटवर्क भी वहा काम नहीं कर रहा था जिससे वो किसी को मदद के लिए बुला सके |
अमोल कार से बाहर निकला और उस चाल में मदद के लिए गया लेकिन वह चाल एकदम सुनसान थी | एक भी इन्सान बाहर नहीं था | अमोल एक घर के बाहर खटखटाने लगा और मदद मांगने लगा लेकिन दरवाज़ा नहीं खुला | ऐसा करते वो चार पांच दरवाजों को खटखटाया लेकिन किसी ने भी दरवाज़ा नहीं खोला | अमोल चिल्लाकर बोलने लगा कि ये बस्ती वाले कैसे लोग है किसी की मदद नहीं करते है तभी वहा एक आदमी ने दरवाज़ा खोला और बोला कि रात होने के बाद यहा कोई किसी की मदद नहीं करता | ये सुनकर अमोल हैरान हो गया | उधर उसकी पत्नी प्रसवपीड़ा से तड़प रही थी |
थोड़ी देर में निराश होकर वहा बाहर चबूतरे पर बैठ गया तभी पहली मंजिल पर एक दरवाज़ा खुला | अमोल दौड़ा दौड़ा उपर उस मंजिल पर गया | वहा एक औरत खडी थी और बोली “बेटा , तुम इतनी रात यहा क्या कर रहे हो ” | अमोल ने सारा किस्स्सा बताया तो उस बुढी औरत ने कहा “यहाँ कोई किसी की मदद नहीं करता ” |तब बुढी औरत ने बताया की वो 30 सालो तक अस्पताल में दाई का काम करती थी और नेहा को लाने को बोला | अब अमोल नेहा को लेकर आ गया |
उसने नेहा को देखा और कुछ दवाइया लाने को बोला | अब अमोल दवाइया लेने गया लेकिन वहा उस सुनसान इलाके में तो कोई दूकान ही नहीं थी | अमोल काफी चक्कर काटकर निराश होकर लौट गया | अब वो उस बुढी औरत के कमरे की ओर गया और देखकर चौंक गया कि उस कमरे के दरवाजे पर तो ताला लगा हुआ था | उसने आस पड़ोस से चिल्लाकर उस बुढी औरत के बारे में पूछा तो लोगो ने बताया कि वो कई साल पहले मर चुकी है | अब अमोल काफी घबरा गया |
उसने पत्थर से पटक पटक कर ताला तोड़ दिया और अंदर गया | उस कमरे में देखा तो उसकी पत्नी मर चुकी थी | अमोल चिल्लाकर रोने लगा | तभी वो बुढी औरत उसको दिखी और बोलने लगी “कई साल मेरी बेटी को कुछ गुंडे उठाकर ले गये और मोहल्ले के एक इन्सान ने मेरी मदद नहीं की और तड़प तड़प कर मेरी मौत हो गयी तब से यहा कोई किसी की मदद नहीं कर सकता ” अमोल अपनी फूटी किस्मत को लेकर रोता हुआ अपनी पत्नी को लेकर वहा से चला गया |
मित्रो ये पुरी कहानी उस चाल के रहने वाले लोगो ने बताई थी जिसे “मानो या मानो ” टीवी सीरियल में दिखाया गया था | अब इस पुरी घटना में कितनी सच्चाई है ये तो नजरवाडी के लोग ही आप को बता सकते है
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