रेलवे ट्रैक पर हुआ डायन से सामना | Encounter with Daayan at Railway Track
मित्रो मेरा नाम अम्बर शर्मा है और मै दिल्ली का रहने वाला हु | मुझे बचपन से ही ट्रेन में सफर करने का बहुत शौक था और एक हादसे की वजह से आज मै ट्रेन के पास जाने से भी घबराता हु |
ये हादसा उस समय का है जब मेरे दादाजी का देहांत हुआ था और वो उस समय बुदाऊ [यूपी ] में थे | मुझे उनका शोक सन्देश बुदाऊ से 35 किमी दूर उनके गाँव में देने जाना था | मै गाँव जाकर उनकी पैतृक परिवार को शोक सन्देश पहुचाया और फिर गाँव से बाहर आकर बस स्टॉप पर खड़ा हो गया | उस समय वहा कोई भी गाडी नहीं थी | उस समय सर्दिया चल रही थी और मुझे बड़े जोरो की ठण्ड लग रही थी | मैंने थोड़ी दूर पर एक चाय स्टाल वाले को देखा और उसके पास गया और उनसे गाडी के बारे में पूछा | उसने बताया कि अभी तो कोई बस नहीं मिलेगी लेकिन इस रेलवे ट्रैक पर एक किलोमीटर की दूरी पर रेलवे स्टेशन है और रात 9 बजे आखिरी ट्रेन जाती है |
मैंने बिना देरी किये उस रेलवे ट्रैक पर चलना शुरू कर दिया | 200 मीटर चलने पर मुझे एक औरत दिखाई दी और मै भागकर उसके पास पहुचना चाहता था ताकि वो मुझे रेल के बारे में बता सके | मै जैसे ही उसके पास गया और उससे स्टेशन के बारे में पूछना चाहा तो बोली “मुझे कुछ नहीं पता और यहाँ से भाग जाओ ” | मै उसके पीछे पीछे चलता गया और थोड़ी देर बाद देखा तो उसकी चाल मुझे अजीब लग रही थी | मैं अपने मोबाइल का टोर्च जलाकर उस औरत को देखना चाहता कि ये औरत इतनी रात को इस रेलवे ट्रैक पर क्या कर रही है | जैसे ही मैंने टोर्च जलाया वो औरत बोली “टोर्च बंद कर दे वरना तेरी साँसे बंद कर दूंगी “|
मैं उसकी आवाज़ सुनकर डर गया और वापिस उस स्टाल वाले की तरफ चलने लगा | थोड़ी देर चलने पर मुझे उस औरत के जोर से हंसने की आवाज़ आयी और बोली “मैंने आज एक शिकार पहले ही कर लिया है इसलिए मै तेरा कुछ नहीं करूंगी ” | ये कहते ही वो जोर से मेरी तरफ आयी और जब तक मै कुछ कर पाता तब तक उसने मेरे हाथ को जोर से पकड़ा और मैं बेहोश हो गया |
थोड़ी देर बाद जब मुझे होश आया तो मैंने देखा वहा कोई भी नहीं था | मैं जोर से रेलवे स्टेशन की तरफ भागा और वहा सीधे स्टेशन मास्टर के कमरे में चला गे और उनको सब बताया तो उन्होंने मुझे चाय पिलाई और कहा कि “जिससे तुम मिलकर आये वो एक डायन थी आज तुम बच गये ये आज से कई साल पहले इस ट्रैक के नीचे कटकर मर गयी थी और उसकी आत्मा आज भी इस ट्रैक पर भटकती है ” | अब मै सारा माजरा समझ गया और ट्रेन में बैठकर दादी के यहा चला गया | इस घटना के बाद से मुझे ट्रेन और रेलवे ट्रैक से बहुत डर लगता है
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