एक ऐसी जनजाति , जो मुर्दे की राख खाकर करती है अंतिम संस्कार A Tribe Eats Dead Body Ash as Ritual
मित्रो हमने भारत में कई ऐसी अनोखी प्रथाओ से आपको अवगत कराया है आज हम आपको एक भारत के बाहर एक ऐसी जनजाति के बारे में आपको बताएँगे जो A Tribe Eats Dead Body Ash as Ritual मुर्दों की राख खाकर अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करती है |
यानोमानी एक ऐसी जनजाति है जो मूलतः भारत से है लेकिन समय के साथ वो अमेज़न नदी के किनारों पर वेंजुअला और ब्राज़ील के जंगलो में रहती है | इस जनजाति की आबादी 20000 से भी अधिक है | इस जनजाति के लोगो की लम्बाई ज्यादा नहीं होती है और ये अधिकतर नग्न अबस्था में शबोनो नाम के छोटे टेंट में रहते है | लड़ाइया होना इस जनजाति की आम बात है | इस जनजाति का बाहरी दुनिया से कम ही सम्पर्क है और ये बाहरी लोगो से मिलना कम ही पसंद करते है लेकिन जो लोग इस जनजाति से मिले है उनसे इस जनजाति की एक अनोखी परम्परा के बारे में पता चला है | क्या है यह परम्परा , आइये जाने
Ritual of These Tribe
इस जनजाति के लिए मौत एक अहम मुद्दा है | इस जनजाति के अनुसार मौत के बाद मृतक की आत्मा की रक्षा करना उनका दायित्व होता है | इस जनजाति की प्रथा के अनुसार किसी की भी मृत्यु के बाद उसकी आत्मा को शान्ति देने के लिए उस मृतक को जलाने के बाद उसकी राख को पुरे परिवार के लोगो को खाना होता है | इस प्रथा को पुरी करने के लिए पहले मृतक को जलाने के बाद उसकी हड्डिया और राख इखट्टे की जाती है जिसके दौरान मृतक के परिजन रोकर और गाने गाकर इसको पूरा करते है |
अब उन हड्डियों और राख को पीसकर एक घड़े में भर दिया जाता है और इस प्रथा के दुसरे दौर का इन्तेजार किया जाता है यह दूसरा दौर कोई उत्सव या त्यौहार हो सकता है | इस उत्सव पर केले की सब्जी में इस घड़े से राख को मिला दिया जाता है और मृतुक के हर एक परिजन को यह सब्जी खाने को दी जाती है | इस प्रथा को पुरी करने के बाद आत्मा को मुक्ति मिल जाती है | इस जनजाति के अनुसार यदि यह प्रथा नही की जाए तो मृतुक की आत्मा जीवन और मृत्यु के बीच झूलती रहती है और आत्मा बनकर अपने परिजनों को परेशान कर सकती है |
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