Jamali Kamali मस्जिद , जहा रात ढलते लगती है जिन्नों की महफिल
The Secrets of Jamali Kamali Masjid in Hindi
मित्रो हमने अब दिल्ली के कई प्रेतबाधित जगहों से रूबरू करवाया होगा | आज इसी कड़ी में हम आपको दिल्ली की एक ऐसी मस्जिद से रूबरू करवाएंगे जहा पर रात ढलते ही जिन्नों की महफिल शुरू हो जाती है | इस जगह का नाम जमाली कमाली मस्जिद Jamali Kamali Masjid है जो क़ुतुब मीनार के नजदीक स्थित है | बहुत कम लोग इस जगह के इतिहास के बारे में जानते है जो कि मुग़ल काल की इसकी प्रसिद्धी क़ुतुब मीनार से भी ज्यादा थी लेकिन अब इस जगह को लोग केवल एक भूतहा जगह के अलावा किसी और नाम से नहीं जानते है
यह मस्जिद Jamali Kamali Masjid महरौली जैविक पार्क के नजदीक है जो की कुतुबमीनार के प्रवेश द्वार से 500 मीटर की दूरी पर है इस मस्जिद में जमाली और कमाली की अलग अलग कब्रे है | इस मस्जिद में प्रवेश को कोई शुल्क नहीं है और इसमें बने पार्क में अधिकतर बच्चे खेलते रहते है | आइये इस जगह की भुतहा घटनाओ से पहले इस मस्जिद के इतिहास पर प्रकाश डालते है |
जमाली शब्द शेख हमीद बिन फजलुल्लाह उर्फ़ जमाल खान से लिया गया है जो कि अपनी कविताओ के लिए प्रसिद्ध एक सूफी संत थे | जमाल खान सिकंदर लोदी के शाषनकाल [1489-1517] में भारत आये थे और दिल्ली में ही बस गये | वैसे तो लोग उन्हें कई नामो से जानते थे लेकिन उनकी कविताओ ने उन्हें जमाली नाम से मशहूर कर दिया था |ऐसा माना जाता है कि सिकन्दर लोदी उनकी कविताओ के इतने कायल थे कि उनके शब्दों का इस्तेमाल करके वो खुद भी एक कवि बन गए थे | मुगलों के शाषनकाल में उन्हें बाबर के दरबार में जगह मिली जो हुमायु की मौत तक उस दरबार में रहे | ऐसा माना जाता कि हुमायु ने खुद जमाली की मौत के बाद उसका मकबरा बनवाया |
जमाल खान उर्फ़ जमाली के इतिहास से आपको रूबरू करवा दिया अब हम आपको कमाली के इतिहास के बारे में बताते है | वैसे तो कमाली का इतिहास रहस्यमयी है क्योंकि इतिहास में उसके बारे में कही नहीं लिख रहा है कि वो जमाली के शिष्य थे या दुसरे कवि थे या फिर एक नौकर थे | कोई भी उनका असली नाम नहीं जानता केवल कमाली ही लोगो की जबान पर है | कमाली के बारे में बहुत सी कहानिया प्रचलित है जैसे कमाली की कहनियो का शश्रेय जमाली ले लिया करता था
एक दुसरी कहानी में ये बताया जाता है कि जमाली और कमाली दोनों भाई थे और जमाली तो अपनी कविताओ से प्रसिद्ध हो गया लेकिन कमाली केवल सूफी संत बनकर रह गया | कुछ कहानियों में कमाली को एक औरत बताया गया है जो जमाली की पत्नी थे और कमाली की मौत के बाद जमाली ने उसका मकबरा बनवाया और हुमायु ने जमाली की मौत के बाद उसकी पत्नी के करीब ही उसका मकबरा बनवाया |
कुछ इतिहासकारों का ऐसा भी मानना है कि गुरु ग्रन्थ साहिब बे बाबा फरीद के नाम से लिखी जाने वाली कविताये जमाली ने लिखी थी | इस मस्जिद की नीव मुगलकालीन तरीके से रखी गयी लेकिन ये समय के साथ धुंधली हो गयी | यहा पर प्रचलित अनहोनी घटनाओ की वजह से लोग यहाँ आने से डरते है
इस जगह Jamali Kamali Masjid के बारे में कई भ्रान्तिया प्रचलित है कि जमाली कमाली की रूह जिन्नों के साथ रहती है | कुछ लोगो का ये भी मानना है कि रात को यहा बिजली झपकना , जानवरों के चिल्लाने और अदृश्य परछाइयो को देखा गया है जैसे कि कोई आपके नजदीक खड़ा हो और आप उसे देख नहीं पा रहे हो | कुछ लोगो ने ये भी बताया कि मीनार के नजदीक कोई थूकता है लेकिन नजर नहीं आता है | यहा पर रात को चलने वाली हवाए इस जगह को ओर ज्यादा डरावनी बना देती है | सबसे ज्यादा प्रसिद कहानी ये है कि रात को यहा पर जिन्न लोगो को थप्पड़ मारते है |
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वैसे पर ज्यादातर लेखो में इस जगह पर जिन्नों के होने का उल्लेख किया गया है| मुस्लिम मान्यता के अनुसार अल्लाह ने इंसानों को रेत से और जिन्नों को आग से बनाया है और जिन्न भी इंसानों की तरह अच्छे और बुरे दोनों तरह के होते है | कई बार जिन्न इंसानी दुनिया में प्रवेश कर जाते है और वीरान जगहों पर अपना कब्ज़ा कर लेते है ऐसा ही वाकिया इस जगह पर हुआ कि कई सालो से ये जगह वीरान थी जब तक कि ASI ने इसे सरंक्षित नहीं कर लिया | जिन्नों ने इस जगह को अपना गढ़ बना लिया और हर रात उनकी यहा पर महफिल लगती है|
हालांकि इस मस्जिद Jamali Kamali Masjid की रखवाली करने वाले चौकीदारों ने यहा पर भूतो और जिन्नों के होने को नकार दिया है लेकिन जगह प्रख्यात होने के बजाय इन कहानियों की वजह से कुख्यात हो गयी | इन कहानियों के चलते कई लोग इस मस्जिद में घुमने आते है और इसके रहस्य को ढूंढते रहते है | मित्रो अगर आपने ये जगह देखी हो तो आप इस जगह के रहस्य और अनुभव को अपने कमेंट के जरिये जरुर बताये |
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