खून उगलती बुढ़िया का खौफ
आज में अपनी जिंदगी की वह बात आप सब से कहने जा रहा हूँ, जिसे आज तक मैंने डर और खौफ के कारण सब से छूपाया था। मेरा नाम एकलव्य पंथ है। और में आर्ट्स का विद्यार्थी हूँ। सात साल पहले की बात बताने जा रहा हूँ। हमारा घर दिल्ली में पोपट वाडी में है। ठीक हमारे घर के सामने मटुमाँ नाम की एक डरावनी बुढ़िया रहती थी। वह बुढ़िया बच्चो को डराने, पैड पौधों को एसिड से जला देने, और लोगो पर मैली विद्या का प्रयोग करने के लिए बदनाम थी।
मटुमाँ के दोनों बेटे और उसकी बहूए उसे छोड़ कर अलग हो गए थे। मटुमाँ रात रात भर जाग कर आग जला कर पता नहीं क्या क्या मंत्र पढ़ती रहती थी। पूरे मोहल्ले में उसका आतंक था। कोई उसके मुह नहीं लगता था। हम सब बच्चे तो उसके घर के पास भी भटकते नहीं थे। कभी कभी क्रिकेट खेलते वक्त गेंद चली जाए उसके घर पर तो, गेंद वापिस लाने सारे, आठ दस बच्चे मिल कर ही उसके घर जाते थे।
ऐसा बताया जाता है की मटुमाँ जादूटोने कर के औरतों के बच्चे गिरवा देती थी। और लोगो पर मैली विद्या से टोटके कर के उनका खून चुस्ती थी। मोहल्ले में लोग उसके बारे में तरह तरह की बातें करते थे।
एक दिन अचानक मेरी नींद सुबह में छे बजे खूल गयी। मुझे सिर फाड़ देने वाली बुह आ रही थी। मेंने माँ से शिकायत की। मेरी माँ भी बोली की उसे भी दुर्गंध आ रही है। हमने खिड़की से झांक कर देखा तो उस डरावनी बुढ़िया मटुमाँ के घर से धुवा निकाल रहा था। माँ बोली की पक्का उस बुढ़िया ने कुछ अनशन पकाया होगा। इतना बोल कर माँ फिर से सो गयी।
थोड़ी देर बाद फिर से खिड़की से झाकने पर मुजे पता चला की मटुमाँ उसके छज्जे पर बैठ कर खून की उल्टियाँ कर रही है। मेरा दिल दहल गया, जो बुढ़िया ठीक से चल नहीं पाती वह छज्जे पर कैसे चढ़ गयी, और उसे खून की उल्टियाँ क्यूँ हो रही है, यह सोच सोच कर में तो चकराने लगा।
में फौरन भाग कर चौक में गया तो देखता हूँ, मटुमाँ छत पर से मुजे ही घूर रही थी…. और उसने हाथ मेरी और कर के मुजे अपने पास आने को कहा… मेरी तो पेंट गीली हो गयी॥ में भाग कर अपने घर में घुस गया। और डर के मारे किसी से कुछ नहीं कहा। और फिर से बिस्तर में घुस कर सो गया।
में डर के मारे बुरी तरह काँप रहा था, और खून उगलती मटुमाँ के बारे में सोचे जा रहा था। और परेशानी की बात तो यह थी की दुर्गन्द अभी भी आ रही थी। सुबह दस बजे जब फिर से मेरी नींद खुली तो देखा मोहल्ले में लोगो की भीड़ जमा थी। सब बात कर रहे थे। की मटुमाँ तीन दीन पहले ही मर गयी थी, और उसी की बदबू सब को आ रही थी। मेरा कलेजा तो जेसे मुह को आ गया… क्यूँ की मेंने सुबह छ: बजे ही मटुमाँ को छज्जे पर खून उगलते देखा था। और मेरी बदनसीबी से उसकी नजर भी मुझ पर पड़ गयी थी, और उसके मुजे बुलाने का क्या मतलब होगा। यह बात मुझे पागल किए जा रही थी।
कुछ ही दिनों में मेरा कॉलेज खत्म हो रहा है। हॉस्टल से फिर में घर जाने वाला हूँ। मुजे पता नहीं की कहीं फिर से उस पापी बुढ़िया के भूत ने मुजे डराया तो में क्या करूंगा। और कहीं अगर उसने मुजे कोई नुकसान पाहुचाया तो मेरा क्या होगा। में अभी भी पूरी तरह से डर के साये में हु। मेरी सलामती के लिए दुआ करना दोस्तो।
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