जंगल में हुआ गमछे वाले भुत से सामना Experienced Ghost in Creepy Jungle
मित्रो मेरा नाम कृष्णा है और मै मुंबई का रहने वाला हु | आज मै आपको मेरे साथ घटी एक सच्ची घटना बताने जा रहा हु जिसके बारे में सोचकर आज भी मुझे नींद नही आती है | मै बचपन से ही छुट्टिया मिलते ही अपने नाना नानी के यहा जाया करता था और इस बार भी मै छुट्टियों में नाना नानी के यहा जा रहा था | मेरे नानाजी के गाँव में जाने के लिए जंगल के रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है क्योंकि सड़क के रास्ते से काफी समय लगता है इसलिए बचपन से ही मेरे मामा के साथ मै इस जंगल से गुजरता था | ये पहला मौका था जब मेरे साथ कोई नही था और मै अपनी बाइक से उस कच्चे रास्ते से गुजर रहा था |
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उस दिन छुट्टिया पड़ने की खुशी में सारे दिन मै दोस्तों के साथ घूमता था जिसके कारण शाम को मुझे काफी देर हो गयी थी | एक बार तो मैंने सोचा कि रात हो चुकी है सुबह चला जाऊँगा लेकिन नानाजी के यहा दूध घी के बारे में याद करते हुए मै रात 8 बज ही घर से निकल गया | मै खुशी खुशी रास्ते में अकेला गुनगुनाते हुए जा रहा था | वो जंगल एकदम सुनसान था और रात को उस रास्ते से कोई नही गुजरता था लेकिन गाँव पहुचने की जल्दबाजी के कारण मुझे इन बातो से कोई मतलब नही था |
जब मै जंगल के बीच में पहुचा तब अचानक मुझे टोर्च जैसी रोशनी दिखायी दी | मैंने सोचा इतनी रात को इस घने जंगल में कौन घूम रहा होगा | मै जैसे जैसे आगे बढ़ रहा था उसकी रोशनी बढती जा रही थी | तभी मुझे धोती कुर्ता पहने हुए एक आदमी नजर आया , जो गाडी को रोकने के लिए हाथ का इशारा कर रहा था | मैंने पहले तो गाडी नही रोकने की सोची क्योंकि मै सोच रहा था कि कोई चोर लुटेरा होगा लेकिन जब फिर मैंने सोचा शायद कोई जंगल में भटक गया होगा इसलिए गाडी रोक दी |
मैंने उससे पूछा कहा जाना है | वो आदमी बोला तो कुछ नही बल्कि उंगली से मेरे नानाजी की गाँव की तरफ इशारा कर दिया | मैंने कहा “ठीक है बैठ जाओ , मै भी उधर ही जा रहा हु “| वो मेरे बाइक के पीछे बैठ गया और मैंने बाइक शुरू कर दी | थोड़ी देर बाइक चलाने के बाद अचानक मेरे बाइक की स्पीड कम हो गयी | मैं जोर से रेस दे रहा था फिर भी बाइक 20 की स्पीड से ज्यादा नही चल रही थी | मैंने सोचा कि अगर ऐसे बाइक चली तो गाँव पहुचते तो आधी रात हो जायेगी और इस जंगल में कोई मैकेनिक भी कहा मिलेगा |
अब चलना तो था ही इसलिए धीरे धीरे ही बाइक चला रहा था | अब मैंने पीछे बैठे आदमी से फिर बात करने की कोशिश की लेकिन वो बस हां हु कर रहा था | उसने मुह पर गमछा बाँध रखा था जिससे उसका चेहरा साफ़ नही दिख रहा था | थोड़ी देर बाद अचानक मेरे बाइक की स्पीड बढकर 80 हो गयी और रेस कम करने भी कम नही हो रही थी | अचानक से मेरे पीछे बैठे आदमी का गमछा हवा में उड़ गया और जब मैंने कांच में उसका चेहरा देखा तो मेरे होश उड़ गये | उसका चेहरा एकदम नीला था और उसकी आंखे एकदम सफेद थी |
कांच में देखते ही मेरा पूरा शरीर कांपने लग गया और बाइक से मेरा संतुलन गडबडा गया | जिससे मेरी बाइक नीचे गिर गयी और मै दूर तक घसीटता चला गया | मेरे पैरो में चोट आयी थी लेकिन मैंने चोट की परवाह किये बिना भागना शूरू कर दिया | मुझे थोड़ी दूर पर ही गाँव की रोशनी नजर आ रही थी | मैंने भागते हुए जब पीछे देखा तो लौटता हुआ मेरे पीछे आ रहा था और भयंकर धुल उड़ रही थी जिससे मेरी मुझे साफ़ दिखाई नही दे रहा था फिर भी मै भाग रहा था | अचानक धुल के बीच मुझे ऐसा लगा कि उसने मेरा गल पकड़ लिया और मुझे घुटन होने लगी |
तभी मुझे सामने से गाँव के 2-3 लोग जंगल की ओर आते दिखे तो मै जोर से मदद के चिल्लाया तो दौड़ते हुए मेरी तरफ आये और धुल में लाठिया बरसने लगे | उनकी कुछ लाठिया मुझे भी लगी लेकिन वो भुत भाग गया था | अब वो मुझे तुंरत नानाजी के घर पर लेकर गये और उन लोगो ने बताया कि वो जंगल के पास की अपने खेतो में रात की रखवाली कर रहे थे इसलिए उन्होंने मेरी आवाज सुन ली वरना आज तो भगवान ही मालिक था |
मैंने उन लोगो से और नानाजी से उस गमछे वाले आदमी के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि कई साल पहले सुखा पड़ने पर जब एक किसान की फसल बर्बाद हो गयी और भारी कर्जे में डूब गया | इसी वजह से उसने जंगल में जाकर अपने गमछे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली तब से रात को कोई भी इस रास्ते से अकेला नही गुजरता है क्योंकि यहा पर अकेले गुजरने वाले लोगो को खुद की तरफ पेड़ पर फांसी से लटकाकर मार डालता है और 2-3 लोगो तो मौत के घाट उतार चूका है |
अब मुझे सारी घटना पता चली लेकिन मै अब भी काप रहा था | उस घटना के बाद मै कभी जंगल वाले रास्ते से अपने गाँव नही गया और उस घटना के बारे में सोचते हुए मुझे आज भी सिहरन पैदा होती है |
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