कर्म-कांड क्रिया का काम करते हुए पीछे पड़ा भयानक प्रेत Ghost Enters into Body
हमारा नाम काशी भट्ट है। और हम जाती से ब्राहमीण हैं। हम शादी-ब्याह, जन्म, मरण, जनेव, शांति पाठ, कथा, यग्न और अन्य तरह के कर्म कांड करने का काम करते हैं। मैंने करीब एक साल पहले ही यह कर्म कांड वाला हमारा पुश्तेनी काम शुरू किया था। काम अच्छा चल रहा था। पैसे भी खूब मिल रहे थे। और यजमान गण की और से भेंट भी काफी मिल रही थी। पर एक खतरनाक घटना के कारण मेरी ज़िंदगी दर्द और खौफ से भर गयी। किसी की तकलीफ दूर करते करते मेरी अपनी जान आफत में फस गयी। प्रेत निकाला अनुष्ठान करना मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी भूल थी।
कुछ दिनों पहले की बात है। जब एक परिवार अपनी तकलीफ़ें ले कर मेरे घर आया। उनके पूर्वज में से कोई प्रेत बन कर भटक रहा था। और जिसके लिए मैंने शांति पाठ करने और उस प्रेत की मुक्ति का अनुष्ठान कराने की उन्हे सलाह दे दी। वह लोग बोले की आप ही यह सब करा दो। मुजे उन जटिल क्रियाओं का अनुभव तो नहीं था पर उस अनुष्ठान की रीत ज़रूर पता थी। पहले तो मैंने उन्हे माना किया पर जब उन्होने ग्यारह हज़ार की गड्डी मेरे सामने रखी, तो मैने सोचा की ऐसे यजमान को हाथ से जाने देना मूर्खता होगी।
मैने फौरन हामी भर दी। और अगले ही दीन सुबह पवित्र अनुष्ठान कराने उनके घर जा पहुंचा। मैने श्लोक बोल्न शुरू किए। और उन सब को अग्नि के सामने हाथ जौड़े बैठा दिया। अनुष्ठान के शुरू हुए अभी पाँच ही मिनट हुए थे की धड़ाम से उनके घर की अलमारी गिरि…. यह संकेत था की उनका पूर्वज प्रेत हाजिर हो चुका है…
जल से भरे पानी के लोटे उछल कर इधर उधर गिरने लगे… और भयानक आवाज़े आने लगीं… मुजे यकीन नहीं हो रहा था… की यह सब दिन के उजाले में हो रहा था। तभी अचानक उस गुस्सैल प्रेत ने अदरस्य स्वरूप में ही रह कर यजमान की बड़ी बेटी का गला पकड़ लिया… और वह उसे दबाने लगा… वहाँ तो चीख पुकार मच गयी… और सच कहूँ तो मैंने भी ऐसा मंज़र पहली बार देखा था।
मुजे तो लगा था की अनुष्ठान के मंत्रोचार से प्रेत की मुक्ति हो जाएगी यजमान के परिवार को शांति मिल जाएगी और मुजे पैसे मिल जाएंगे। पर वहाँ की हकीकत काफी तो डरावनी थी। मैंने यजमान की बड़ी बेटी को गायत्री मंत्र वाला जल पीला दिया। और वह फौरन ठीक हो गयी। अब उस गुस्सैल प्रेत ने यजमान की पत्नी के बाल पकड़ लिए और उन्हे घसीटने लगा। यह सब देख कर मेरे तो हौश उद उड़ गए। मैंने उन्हे भी पवित्र जल पिलाया। और वह भी ठीक हो गयी।
इस बार उस गुस्सैल प्रेत का निशाना मैं था। क्यूँ की मैं ही उन लोगों को उस प्रेत के प्रकोप से बचा रहा था। अचानक ही अंदर एक धधकती हुई परछाई घुस गयी। मेरे पूरे बदन में आग सी लग गयी… डर के मारे मै चिल्लाने लगा… मेरा दिल बैठे जा रहा था… क्यूँ की मुजे लगता था की वह प्रेत मेरे शरीर में आ कर स्थित हो चुका है। यजमान नें फौरन फोन कर के मेरे घर वालों को वहाँ बुला लिया।
मेरे परिवार वाले मुजे वहाँ से उठा कर घर ले आए। मेरी हालत काफी खराब थी… मै सदमे मे था। तीन दिन तक कुछ खाया नहीं। और डर के मारे सोया तक नहीं… उन दिनों मेरा शरीर भट्टी की तरह जलता रहता था। और मुजे खून की गंध आती रहती थी। हर वक्त जान दे देने का मन किया करता था। और डर के मारे मै छोटे बच्चों की तरह रोता रहता था। रात में कभी कभी तो मुजे ऐसा महसूस होता था की सोते वक्त कोई मेरी छाती पर चड़ कर बैठा है। और मेरा गला दबा रहा है। वह एहसास दिल देहला देने वाला था।
मेरे परिवार वालों ने हमारे ब्राहमीण समाज के अनुभवी पुरोहित को घर बुलाया। और उन्हे मेरा उपचार करने के लिए प्रार्थना की। वह अनुभवी पुरोहित फौरन पहेचान गए की में एक प्रेत की चपेट में आया हुआ हु। और वह प्रेत मेरे शरीर में आता जाता रहता है। वह पुरोहित मेरी आँखों की पुतलियों की और अपनी दो उंगली दिखा कर, कुछ धार्मिक मंत्र बोलने लगे और उन्होने ज़ोर से चिल्ला कर, मेरे ऊपर एक “अंजुली भर पानी” फेंक मारा।
उनके ऐसा करते ही जैसे मेरे अंदर से आग का गोला बाहर निकल गया, और पूरे शरीर में ताजगी और मधुर ठंडक फ़ेल गयी। मैंने उनके पैर छूए, और प्रेत से त्रस्त परिवार को भी इन अनुभवी पुरोहित से मिला दिया। उन्होने मेरे उन यजमान की तकलीफ भी उसी दिन दूर कर दी।
मैंने उस दिन से किसी भी तरह का भूत-प्रेत मुक्ति अनुष्ठान, ना कराने की कसम उठा ली। “जिसका काम उसी को साजे” जान है तो जहान है
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