सिर कटे भूखे खवीस का बदला Sir Kate Bhukhe Khavis ka Badla

Sir Kate Bhukhe Khavis ka Badlaमेरा नाम चेतन भारद्वाज है। और मै कानपुर का निवासी हूँ। पिताजी के स्वर्गवास के उपरांत माँ ने हमारा पुश्तेनी मकान बेच दिया, और पैसे ,  हम चार भाइयों में बराबर बाँट दीये। उनही पैसों से मैने कानपुर में ही अर्जुन नगर में एक मकान खरीदा। जहां पर मै और मेरी पत्नी उषा हमारा बेटा नकुल और मेरी माँ हम सब रहने लगे। चारों भाइयों मै सब से छोटा भाई मै हूँ, इसी लिए माँ का लाड़ला भी हूँ। इसी लिए माँ मेरे साथ रहती है। हमारा नया मकान काफी बड़ा है। हम सब वहाँ रहने जाने से खुश थे। पर मेरी एक गलती के कारण मैने खवीस से दुश्मनी मोल ले ली थी।

नए मकान मकान पर रहने जाते ही पहले ही दिन एक भिखारी ने घर का दरवाजा खटखटाया और खाना मांगने लगा। तब हम नए नए शिफ्ट हुए थे। खाना कुछ था नहीं इस लिए मेंने जेब से दस का नोट निकाल कर उसे भिखारी को दिया। पर उसने पैसे लेने से मना कर दिया। और कहने लगा की “मुजे खाना दो में भूखा हूँ। और अभी मुजे मेरा सिर भी ढूँढने जाना है।“ मै उसकी यह अजीब बात सुन कर थोड़ा गुस्से मै आ गया। और उसने मुजसे पैसे भी नहीं लिए थे, उसका भी मुजे गुस्सा था। तो मेंने उसे चले जाने को कहा…

वह गया नहीं और खड़े खड़े ही मुजे घूरने लगा… और उसने मेरी चौखट पर थूक दिया… उसके इस बर्ताव से मुजे  क्रोध आया,  और मेरा सब्र का बांध टूट गया… मेंने उसे गाली दी… और गुस्से मै लात मार दी… मेरी लात उसके पेट पर लगी… फिर मैने उसे धक्का दे कर निकाल दिया… जाते जाते वह भिखारी जो मुजे बोला, वह कुछ इस प्रकार था….

भिखारी : “तुम्हारे पास मुजे खिलाने के लिए एक रोटी भी नहीं? अब मै तुम्हें बताऊंगा की भूखे के पैट पर लात मारने की सजा क्या होती है”

उस रहस्यमय भिखारी का बर्ताव मेरे साथ बुरा था, पर शायद मेरा जवाब उसके बरताव से भी बुरा था। जिसका एहसास “भयानक खवीस के प्रकोप” ने मुजे करवाया। हमने घर ठीक ठाक जमा लिया था और उस भिखारी वाले किस्से को भूल कर हम अपनी दुनियाँ मै मस्त रहने लगे। अगले ही सप्ताह सुबह ब्रश करते हुए बिना सिर वाला एक व्यक्ति मेरे घर के आँगन में मुझे दिखा। मेरे हाथों से पानी भरा लौटा छूट कर गिर गया। और मै चिल्लाता हुआ घर के भीतर भागा।

घरमें सब को यह घटना बताई पर किसी ने मेरा विश्वास नहीं किया। वह सिर कटा खवीस सिर्फ मुजे ही दिख रहा था। कोई मेरी बात मानने को तयार नहीं था। मै अब खौफ में था। क्यूँ की वह खवीस अब मेरे घर में भी आने जाने लगा था। एक दिन वह खवीस अपनी मुंडी हाथ में पकड़ कर मेरे सामने आया। मुंडी देख कर में फौरन जान गया की यह तो वो वाला भिखारी था। मेरा दिल बैठ गया, क्यूँ की अब में जान गया था। की मैने गुस्से में जिसे लात मारी थी वह एक भूखा खवीस / सिर कटा प्रेत था। जो मुजसे बदला लेने पर तुला हुआ था।

मैने उस से माफी भी मांगी। खाना देने की पेशकश भी की पर वह खवीस मेरे सामने आ कर खड़ा रहता और मुजे सिर्फ डरता जाता। कभी कभी रात में वह मेरी चादर खींचता। और अजीब अजीब आवाजें निकालता। उसकी सारी हरकतें मै ही देख पाता और सुन पाता इस लिए घर में मेरी छाप एक बीमार मानसीक रोगी / पागल जैसी होने लगी।

मैने काम पर जाना भी छोड़ दिया। और दिन भर उस खवीस से डरता बैठा रहता। अपने खौफ की वजह से घर वालों पर भी में बे-वजह चिल्लाता रहता था, और जगड़े करने लगा था। मेरा यह अजीब बरताव देख मेरी पत्नी उषा नकुल को ले कर उसके माइके चली गयी। मेरी माँ को भी लगा की मुजे शायद माँ बोज लगती है, इस लिए मै ऐसा बरताव कर रहा हूँ। इस लिए माँ भी दूसरे भाई के घर रहने चली गयी। अब घर के अंदर उस भूखे भेड़िये खवीस के सामने मै अकेला था।

तभी मेरा दोस्त पवन मुजे मिलने आया। पवन ने फौरन सारी बात समज ली, और मेरे घर के आसपास रहने वाले जानवर, पशु-पक्षी, और आने जाने वाले भूखे भिखारियों को मेरे हाथों से खाना खिलवाया। और उस दिन के बाद मुजे वह सिर कटा खवीस कभी नहीं दिखा। और मेरी रूठी हुई पत्नी भी घर वापिस आ गयी। और माँ तो माँ होती है हमेशा बाच्चों को माफ कर देती है। माँ भी मेरे पास लौट आई। और मेरा दोस्त पवन, दोस्ती का फर्ज़ निभा कर वापिस चला गया।

Comments

Popular posts from this blog

ट्रेन का खौफनाक सफर Train ka Bhoot Story in Hindi

कुलभाटा , जहा गुजरने वाला हर इन्सान, होता है चुड़ैल का शिकार Kulbhata Story in Hindi

वास विला , जहा पिछले 14 सालो से है आत्मा का कब्ज़ा Haunted Vas Villa in Bangalore