ठग तांत्रिक पर प्रेत ने ढाया कहर Thag Tantrik Par Pret ne Dhaya Kahar

Thag Tantrik Par Pret ne Dhaya Kaharमेरा नाम करीम इलाही है, और मेरी बीवी का नाम फातिमा है। काफी कौशीस के बाद भी कम्बक्त अच्छी नौकरी मुजे कभी मिली ही नहीं। छौटे मोटे काम करने मे मुजे कभी इन्टरेस्ट नहीं रहा। और बड़ा काम हम गरीबों को देता कौन। इसी लिए मैने ठगी का धंधा शुरू कर के रूपिये कमाने का रास्ता चुन लिया…

यह बात दो साल पुरानी है, जब मेरे सेठ ने मुजे देरी से काम पर जाने की वजह से नौकरी से निकाल दिया था। घर आते वक्त रास्ते में मैने देखा की एक पिद्दी सा फकीर पैड के नीचे बैठा है, और जाड़ फूँक कर रहा है, उसके पास तीन चार लोग बैठे है और उसे जाड़ फूँक करने के 50 और 100 रुपये दिये जा रहे हैं। मेरा माथा ठनका… मैने वहीं सोच लिया की अब ये जाड़ फूँक का काम करूंगा। मुजे लगा की भूत पलित भगाने ने का धंधा ही मेरी नय्या पार लगा सकता है।

घर जा कर फौरन फातिमा से मैंने अपना आइडिया कहा, फातिमा ने मेरा आइडिया सुनने के बाद, चूल्हे पर तप रही कढ़ी उछाल कर मेरे पर फेंकी। गालियाँ देते हुए उसने मुजे दूसरी नौकरी ढूंढने को कहा। पर मैने उसे एकाद हफ्ते में चिकनी चुपड़ी बाते कर के, एकाद दो महेंगे तौफ़े दे कर मना लिया, और अपनी और कर ही लिया।

अगले दिन हमने घर साफ कर के आगे वाले कमरे में पूरा ताम-जाम लगा लिया। और हर जगह बात फेला दी की भूत, पिशाच, खविस, आत्मा, साया, टोटका, प्रेत किसी भी प्रकार की तकलीफ का एलाज हम करते हैं। दिन पर दिन लोग हमारे घर अपनी तकलीफ़े ले कर आने लगे। और चढ़ावा देने लगे। कोई पैसा देता तो कोई फल दे जाता। कोई कपड़े देता, तो कोई कुछ चीज़े दे जाता। घर में पैसे आने लगे थे, तो अब फातिमा भी खुश थी।

ज़िंदगी मजे से कट रही थी। मानसिक तनाव में भूत बाधा की असर वाले लोगों को मै इलाज के नाम पर दो तीन थप्पड़ लगा देता… कुछ अजीब गरीब मंत्र बड़बड़ा लेता… थोड़ा उस पर चिल्ला लेता… और उसे पानी के छीटे मार कर जाने को कह देता… जाते वक्त लोग कुछ ना कुछ दे कर ही जाते… और उसी कुछ ना कुछ से, मेरा बहुत कुछ फाइदा हो जाता था।

मेरी इस ठगी के धंधे में उस दिन भूचाल आया जब एक पहाड़ी जवान लड़के को चार लोग बेड़ीयों में जकड़ कर मेरे घर लाये। उनहोने कहा की इस लड़के पर लाल चौक के प्रेत ने कब्जा किया है। आप इसका इलाज करो। मुजे उस खूंखार लड़के को देख कर ही डर लग रहा था। फिर भी मैने अपना नाटक स्टार्ट किया। और उसको एलाज के नाम पर दो तीन करारे थपड़ जड़ ही दिये।

और साथ में मै उस पर चिल्ला भी दिया की…. “ छौड़ दे इस जवान लड़के का शारीर वरना मै तुजे भस्म कर दूंगा” वह बेड़ियों मै बंधा लड़का मुजे देख कर हसने लगा। और गुस्से मै मुजसे बोला की… “मै जानता हु की तू कोई ओजा नहीं है, मै एक एक थपड़ के बदले तेरा एक एक मुट्ठि गोश्त तुजसे लूँगा”

एक पल के लिए मुजे लगा की कहीं ये कोई न्यूज़ चेनल वाला तो नहीं जो मेरा भांडा फोड़ने आया है। पर उसकी धम्की सुन कर मेरे रौमटे खड़े हो गए। और अब मुजे लोगो के सामने अपनी इज्जत भी बनाए रखनी थी। तो मैने एलाज के नाम पर और चार पाँच करारे थप्पड़ उसे जड़ दिये। वह फिर बोला…. हिम्मत है तो हाथ खोल….

अब मै डर भी रहा था और दुआ भी कर रहा था की कही इसके अंदर छुपा प्रेत मेरे पीछे ना पड़ जाए। मैने फौरन उसके साथ आए लोगो को उसे ले जाने को कहा… पर वह मना करने लगे… वह बोले के आप इसकी तकलीफ दूर करो तभी हम जाएंगे। रात के तीन बजे तक वह मेरे घर पर ही बैठे रहे… सारे लोग चले गए पर यह चार लोग उस बंधे हुए आदमी को ले कर मेरे घर बैठे रहे।

मैंने अंत मै कहा की अब मै पुलिस को बुला लूँगा… पुलिस का नाम सुनते ही वह चारो हसने लगे। और उनहों ने उस बंधे आदमी को वहीं खोल दिया… और अलगे ही पल वह चारो अंधेरे मै अदृस्य (धुवा) हो गए। यह देख कर मेरे तो होंश उड़ गए।

वह पहाड़ी नौजवान बेड़ियों के खुलते ही अंधरे में मेरी और दौड़ा… जेसे भूखा शेर किसी हिरण के बच्चे की और लपकता है। उसने मुजे दबोच कर नीचे गिरा दिया… और मुजे अपने नुकीले दांतों से काटने लगा… और घुरराने लगा। मेरी धड़कने तेज हो गयी और चीख निकल गयी, फिर में सदमे से बेहोश हो गया। और मेरी आवाज सुन कर पूरा मोहल्ला इकट्ठा हो गया।

जब जागा तो वह रहस्यमय पहाड़ी इन्सान जा चुका था। मेरा सिर मेरी बीवी फातिमा की गौद में था, और सारे पड़ौसी मेरे आस पास खड़े थे।

“अगले दिन सुबह ही, मैने जाड़ फूँक का पाखंड धंधा बंद कर दिया, और अपने पुराने सेठ के पैर पकड़ लिए, और पुरानी नौकरी वापिस शुरू कर दी”

 

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