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Showing posts from June, 2016

मैलीविद्या के टोटके करती चाची का खौफ

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मेरे दादा विट्ठलदास लखानी शहर के जाने माने घी के व्यापारी थे। मेरे पिता राजेश लाखानी को हमारे खानदानी व्यापार धंधे में खास रुचि थी नहीं, इस लिए उन्होने वकालत की पढ़ाई कर ली। और बोण्ड राइटर बन गए। मेरे पिता और उनके दो भाई सब साथ ही रहते थे। मेरे दोनों चाचा मेरे पिता के साथ ही ऑफिस में काम करते हैं। एक दिन मेरी सब से छोटी चाची का असली रूप मैने देखा तब मेरी जिंदगी ही बदल गई। मेरे छोटे चाचा की घर वाली यानी मेरी चाची स्वभाव से काफी जगड़ालू और ज़हरीली थीं। उसे घर का काम करने में और घर के बड़ों का मान रखने में कोई रुचि ना थी। मेरे दादा और दादी को वह बार बार अपमानीत किया करती थी। और उसकी गतिविधिया भी काफी संदिग्ध थी। एक रात तीन बजे मेरी नींद खुल गयी। मैने खिड़की से बाहर देखा तो, पता चला की मेरी छोटी चाची अपने बाल खोल कर बरामदे में खड़ी आकाश की और देख कर कुछ बड़बड़ा रही है। मैंने फौरन नीचे जा कर और पड़ताल की, तो देखा की चाची नें अपने मुह पर खून लगा रक्खा है और उनके एक हाथ में मरी हुई बिल्ली की मुंडी थी। और दूसरे हाथ में बिल्ली का धड़ था। चाची का यह वहशयाना रूप देख कर मै तो दहल गया। और मेरे हाथ पाँव सुन्न...

कैमरे के कैद प्रेत का खौफ Ghost Captured in Camera - A Horror Story in Hindi

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यह उन दिनों की बात है, जब मेरे ऊपर फोटोग्राफर बनने का भूत सवार हुआ करता था। पिताजी से लड़ जगड़ कर पैसा ले कर मैंने निकॉन कैमेरा खरीदवाया था। उन दिनों में अपने आसपास दिखने वाली हर जगह, वस्तु, और इन्सान की तस्वीरें लिया करता था। और खुद को अंदर ही अंदर प्रोफ़ेसनल फोटोग्राफर समजने लगा था। पर मेरी हालत तब खराब हुई जब एक भयंकर डरावना प्रेत मेरे कैमेरे में कैद हुआ। पहले तो मुजे लगा की वह फोटो सिर्फ काली / ब्लैंक इमेज है। पर गौर से देखने पर मेरे रौंगटे खड़े हो गए। क्यूँ की उस में मुजे धुंधली धुंधली दो आंखे दिख रही थी। और वह आँखें, गुस्से से मेरे कैमेरे की और ही घूर रही थी। डर के मारे मैंने फौरन वह फोटो मेमोरी से डिलीट कर दी। और कैमेरा अलमारी में रख दिया। करीब रात के दो बजे अलमारी में हल्की हल्की आवाजें सुनाये देने लगी। मैं डर के मारे चौंक गया। मैंने डरते काँपते अलमारी का दरवाजा खोला तो देखा की मेरा निकॉन कैमेरा कवर से बाहर आ चुका था और कैमेरे ने मेरे सामने लेन्स कर के क्लिक किया। यह एक दिल दहला देने वाली घटना थी। मैं फौरन भाग कर कमरे से बाहर आ गया। और पूरे घर को जगा दिया। पूरी घटना सुन कर पापा मेर...

कर्म-कांड क्रिया का काम करते हुए पीछे पड़ा भयानक प्रेत Ghost Enters into Body

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हमारा नाम काशी भट्ट है। और हम जाती से ब्राहमीण हैं। हम शादी-ब्याह, जन्म, मरण, जनेव, शांति पाठ, कथा, यग्न और अन्य तरह के कर्म कांड करने का काम करते हैं। मैंने करीब एक साल पहले ही यह कर्म कांड वाला हमारा पुश्तेनी काम शुरू किया था। काम अच्छा चल रहा था। पैसे भी खूब मिल रहे थे। और यजमान गण की और से भेंट भी काफी मिल रही थी। पर एक खतरनाक घटना के कारण मेरी ज़िंदगी दर्द और खौफ से भर गयी। किसी की तकलीफ दूर करते करते मेरी अपनी जान आफत में फस गयी। प्रेत निकाला अनुष्ठान करना मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी भूल थी। कुछ दिनों पहले की बात है। जब एक परिवार अपनी तकलीफ़ें ले कर मेरे घर आया। उनके पूर्वज में से कोई प्रेत बन कर भटक रहा था। और जिसके लिए मैंने शांति पाठ करने और उस प्रेत की मुक्ति का अनुष्ठान कराने की उन्हे सलाह दे दी। वह लोग बोले की आप ही यह सब करा दो। मुजे उन जटिल क्रियाओं का अनुभव तो नहीं था पर उस अनुष्ठान की रीत ज़रूर पता थी। पहले तो मैंने उन्हे माना किया पर जब उन्होने ग्यारह हज़ार की गड्डी मेरे सामने रखी, तो मैने सोचा की ऐसे यजमान को हाथ से जाने देना मूर्खता होगी। मैने फौरन हामी भर दी। और अगले ही दीन...

जूनागढ़ के जंगल की चुड़ैल का प्रकोप Junagadh Forest Chudail Story in Hindi

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मेरा नाम रमन है, और मै भावनगर में रहता हूँ, हमारा केबल का बिज़नस है। और आज में आप सब को उस किस्से के बारे में बताना चाहता हूँ, जिसमें मेरी जान जाते जाते बची थी। जूनागढ़ के गिर जंगल में हम तीन दोस्त जंगली जानवर देखने गए थे। वहाँ मुजे जानवर तो ज़्यादा नहीं दिखे पर नाखून से मांस नौचती चुड़ैल मिल गयी। यह मेरी खुशकिस्मती है, की आज में यह रियल स्टोरी शेर करने के लिए ज़िंदा हूँ। दो साल पहले की बात है… मंजीत दोपहर ढाई बजे मेरे घर आया और उसने कहा की, चलो जूनागढ़ घूमने जाने का प्लान बना है। मैंने कहा की मेरा मन नहीं है। तुम लोग चले जाओ। पर मंजीत उन दोस्तों में से नहीं है जो आसानी से पीछा छौड़ दे। उसने मूझे दो घंटे बहेस कर के जूनागढ़ ट्रिप पर चलने के लिए माना ही लिया। जरूरी सामान ले कर हम तीनों ट्रेन में जूनागढ़ के लिए निकल पड़े। रूम ऑनलाइन ही बूक कर लिया था। तो वहाँ जा कर थोड़ी देर आराम कर के हम फौरन गिर जंगल की और निकल पड़े। मेरे साथ मंजीत, गोविंद और हमारा फॉरेस्ट गाइड था। उस समय दोपहर के बारह बजे थे। तो हमने एक पैड के नीचे बैठ कर थोड़ा आराम करने का फैसला किया। तभी मेरी नज़र नदी पर गयी। वहाँ दूर एक हिरण...

जानवरों की जान का दुश्मन प्रेत Animals Captured by Ghost

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मित्रो मेरा नाम अरमान है और विजयनगर में हमारा घर और बागीचा है, मेरे पिता पोस्टमेन हैं। मेरे दादा बागीचे की देखभाल करते हैं। और मै  साइन्स पढ़ता हूँ। हम सब हमारे दादाजी के बनाए मकान में साथ रहते हैं। हमारे दादाजी का बनाया हुआ सुंदर बागीचा घर के पास ही है। वहीं खेल कूद कर मेरा बचपन बीता है। हमारे पिताजी हमेशा कहा करते हैं की दुनियाँ में हम इन्सान अकेले नहीं है। इस धरती पर हमारे साथ बहुत सारी अंजान शक्तियों का वास है। दिन पर दिन इन्सानों की संख्या बढ़ती जा रही है, इसी लिए भूत प्रेत और इन्सानों की मुठभेड़ें भी बढ़ती जा रही है। हमे पता नहीं था की एक दिन हमारे पिताजी की कही हुई यह बात वाकय में सच हो जाएगी। मेरे दादाजी के बागीचे में घूमते प्रेत ने जब हमारे पालतू जानवरों की जान लेना शुरू किया तब हमारे पूरे परिवार का दिल डर के मारे काँप उठा था। एक दिन की बात है जब हमारे बागीचे में बंधी गाय बेहोश हो गयी। हमे लगा शायद बीमार होगी। डॉक्टर को बुलाया तो गाय फौरन जाग कर खड़ी हो गयी, और डॉक्टर को मारने उसके पीछे दौड़ गयी। उस गाय ने जानवरों के डॉक्टर को तीन बार हवा में उछाल दिया। हमे उस डॉक्टर के लिए एंबुलस ब...

गोलकुंडा फोर्ट पर हुआ भूत से सामना Encounter With Ghost at Golkonda Fort

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मेरा नाम रषेश चदूरवेली है। और मै आन्ध्रप्रदेश का रहने वाला हूँ। दो साल पहले मेरे साथ हुई एक भयानक घटना के बारे में मै सबको बताना चाहता हूँ। कॉल सेंटर मै जॉब मिलने की खुशी में मैने अपने सारे दोस्तों को गोलकुंडा फ़ौर्ट घूमने ले जाने की पार्टी दी थी। वहीं मेरा सामना एक भयानक पारलौकिक शक्ति से हुआ था। उस घटना में जब मुझ  पर हमला हुआ तो मै बेहोश हो गया था। उस दिन हम चार दोस्त गोलकुंडा फ़ौर्ट पार्टी करने गए। सारा खर्चा मेरे पर था इस लिए मुजे पता था की मेरे भूक्कड़ दोस्त दबा दबा कर खाएँगे। पर नौकरी मिल चुकी थी तो मेंने भी कंजूसी नहीं की। और ढेर सारा फास्टफूड पैक करा लिया था। गोलकुंडा फ़ौर्ट पर हम चारों कुछ देर तक घूमे और फिर एक जगह छाँव देख कर नाश्ता खाने बैठ गए। दोपहर का वक्त था वहाँ ज्यादा भीड़ भी नहीं थी। हम नाश्ता खाने और मस्ती मज़ाक करने में मग्न थे तभी एक लंबा और काला आदमी उधर आया। और हम चारों को घूरने लगा। हमने पूछा की क्या बात है कुछ चाहिए… तो वह बोला की… “यह मेरा सोने का समय है… तुम लोग मुजे अशांति पहुंचा रहे हो। चले जाओ यहाँ से… और यहाँ फैलाई हुई गंदगी साफ कर के जान...