छलावे का डरावना एहसास Spooky feeling of illusion
मित्रो मेरा नाम जतिन दिवेचा है और मै महाराष्ट्र का रहने वाला हु | आज जो मै आपको किस्सा Spooky feeling of illusion बताने जा रहा हु वो मेरे पिताजी के साथ घटित हुआ | उस समय मेरे पिताजी नगर परिषद अचलपुर मे नौकरी पर थे। ऊस वक्त ऊनकी ड्युटी परतवाडा से 3 कीमी दुर गौरखेडा के नाके पर लगती थी। गाडी का जमाना ना होने के कारण पिताजी सायकल से आना जाना करते थे । रात बेरात की ड्युटी हूआ करती थी। हमारा घर भी गौरखेडा मेँ होने के कारण एक रात पिताजी 1 बजे नाके के लिए निकले। संतरे के बगीचो की थंडक थी। रास्ते पर एक दो लाईटे थी । नाके पर पहूँचे बाद 20-30 मिटर के अंतर पर उन्हें एक बस दिखाई दी | वो बस वहा नाके पर आकर रुकी और उस बस के ड्राईवर ने कंडक्टर को नीचे उतरकर देखने को कहा कि नाका आया या नहीं | मेरे पिताजी को ये देखकर सुकून मिला कि चलो कोई तो बस आयी | मेरे पिताजी ने देखा कि नाके से कोई आदमी बाहर नहीं आया तो वो खुद ही अंदर चले गए | नाके के अंदर उन्होंने देखा कि अंदर एक आदमी बड़ी गहरी नींद में सो रहा था | मेरे पिताजी ने उसको उठाया और बोला “अरे बाहर गाडी आयी है और तुम अंदर आराम से सो रहे ह...